Sunday, 24 January 2021

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पेइचिंग लद्दाख में पिछले 9 महीनों से जारी तनाव के बीच चीन अब हिमालयी क्षेत्र में पानी को लेकर जंग छेड़ने की कोशिश कर रहा है। चीन एक सोची समझी साजिश के तहत तिब्बत से भारत आने वाली नदियों पर बड़े-बड़े कई बांध बनाने की तैयारी कर रहा है। लगातार बढ़ते ग्लोबल वॉर्मिंग प्रभावों के बीच ड्रैगन की मंशा पानी रोककर भारत के निचले इलाकों में सूखा पैदा करने की है। ऐसे में चीन बरसात में पानी छोड़कर भारतीय इलाकों में बाढ़ भी ला सकता है। ब्रह्मपुत्र नदी पर एक मेगा-डैम बना रहा है चीन एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन इन दिनों यारलुंग जांगबो (ब्रह्मपुत्र नदी) पर एक मेगा-डैम बनाने की योजना पर काम कर रहा है। यह बांध कितना बड़ा होगा कि इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चीन में बने दुनिया के सबसे बड़े बांध थ्री जॉर्ज की तुलना में इससे तीन गुना ज्‍यादा पनबिजली पैदा की जा सकेगी। चीन के इस विशाल आकार के बांध से भारत के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों और बांग्‍लादेश में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। भारत-बांग्लादेश से नहीं की कोई चर्चा बनाने को लेकर चीन ने भारत और बांग्लादेश से चर्चा तक नही की है। चीन पानी बंटवारे को लेकर हुई संधियों की भी अनदेखी कर रहा है। इस नदी के निचले हिस्से के पड़ोसियों (भारत और बांग्लादेश) के साथ चीन के विचार-विमर्श की कमी दक्षिण पूर्व एशिया में विवादों को जन्म दे सकती है। मेकांग नदी पर बांध बनाकर चीन दिखा चुका है रंग चीन ने ब्रह्मपुत्र की तरह कई देशों से होकर बहने वाली मेकांग नदी पर भी 11 की संख्या में मेगा डैम का निर्माण किया है। इस कारण म्यांमार, लाओस, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम में पूर्व सूचना के नदी के प्रवाह में व्यापक स्तर पर उतार चढ़ाव होता रहता है। चीन की मेकांग नदी युनान प्रांत से निकलकर म्यांमार, थाईलैंड, लाओस और कंबोडिया और वियतनाम से होकर बहती है। लंबाई के हिसाब से मेकांग दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी नदी है। इन देशों में सूखे के लिए चीन दोषी मेकांग नदीं पूर्वी एशिया में 60 मिलियन लोगों की जीवन रेखा है। कंबोडिया, लाओस, थाईलैंड, म्यांमार और वियतनाम की मीडिया ने देश में सूखे को लेकर कई रिपोर्ट्स को जारी किया है। जिसमें सूखे के लिए चीन के बांध को दोषी बताया गया है। चीन अपने जलविद्युत परियोजना और सिंचाई के लिए मेकांग नदी के 47 अरब क्यूबिक मीटर पानी का उपयोग कर रहा है। ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बन सकता है युद्ध का कारण इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध की डिजाइन को लेकर भारत के साथ संपर्क करने का प्रयास कर सकता है। वर्तमान में भारत के रूख को देखते हुए संभव नहीं है कि दोनों देशों के बीच जल बंटवारे को लेकर कोई समझौता हो सके। ऐसे में अगर चीन यह बांध बनाता है तो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संघर्ष बढ़ सकता है। अरुणाचल प्रदेश की सीमा के बेहद पास बनेगा बांध चीन के सरकारी भोंपू ग्‍लोबल टाइम्‍स ने संकेत दिया है कि यह बांध तिब्‍बत के मेडोग काउंटी में बनाया जा सकता है जो भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा के बेहद पास है। चीन पहले ही ब्रह्मपुत्र नदी पर कई छोटे-छोटे बांध बना चुका है। माना जा रहा है कि इस नए बांध को चीन के नैशनल सिक्‍यॉरिटी को ध्‍यान में रखकर बनाया जा रहा है। नदियों के मामले में चीन को भारत पर रणनीतिक बढ़त उधर, विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्‍ट्रीय नदियों के मामले में चीन को भारत पर रणनीतिक बढ़त हासिल है। लोवी इंस्‍टीट्यूट की रिपोर्ट में कहा गया है, 'चीन ने तिब्‍बत के जल पर अपना दावा ठोका है जिससे वह दक्षिण एशिया में बहने वाली सात नदियों सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, इरावडी, सलवीन, यांगट्जी और मेकांग के पानी को नियंत्रित कर रहा है। ये नदियां पाकिस्‍तान, भारत, बांग्‍लादेश, म्‍यामांर, लाओस और वियतनाम में होकर गुजरती हैं। इनमें से 48 फीसदी पानी भारत से होकर गुजरता है।'


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