Sunday, 17 January 2021

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पेइचिंग/लंदन करीब एक साल से कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाली पहली मरीज की खोज में जारी जांच को छिपाने का आरोप चीन की सरकार पर लगा है। वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरॉलजी की हुआंग यानलिंग को चीन में शेयर की जा रहीं ऑनलाइन रिपोर्ट्स में 'पेशेंट जीरो' बताया जा रहा था। इसके बाद महामारी के फैलने से संस्थान का सीधा संपर्क साफ हो रहा था। हालांकि, इन रिपोर्ट्स में यह नहीं बताया गया था कि हुआंग को वायरस कब हुआ या उनका बाद में क्या हुआ। इससे अमेरिका के उन आरोपों को जरूर बल मिला है जिसमें संस्थान के स्टाफ के शुरुआत में संक्रमित होने का दावा किया गया है। प्रशासन का दावा, 'ठीक हैं हुआंग' चीनी सरकार और लैब अधिकारियों ने ऐसी किसी खबर का खंडन किया था और इंटरनेट से उन्हें हटा दिया। यह भी दावा किया गया था कि हुआंग चीन में कहीं और हैं और सुरक्षित हैं। चीन के वॉट्सऐप WeChat पर सर्कुलेट हो रहे एक मेसेज से लेकर उनके पूर्व बॉस प्रफेसर वेई हॉन्ग पिंग तक के बयान तक में दावा किया गया कि हुआंग ठीक हैं। यहां तक कि चीनी न्यूज एजेंसी ने बिना डीटल दिए हुआंग की नई कंपनी से बातचीत का दावा तक कर दिया। इंटरनेट पर चर्चा तेज हालांकि, हुआंग खुद सोशल मीडिया से गायब हैं और उनकी बायोग्राफी और रिसर्च हिस्ट्री को संस्थान की वेबसाइट से उड़ा दिया गया है। एक साल बाद उनसे जुड़ी सिर्फ एक ही चीज है एक पुरानी तस्वीर जो सोशल मीडिया पर शेयर होती रही है। चीन के ब्लॉगर और इंटरनेट यूजर्स अधिकारियों के दावों पर आशंका जताते रहे। उन्होंने यह भी मांग की हुआंग को सामने आकर सच साबित करना चाहिए। जिंदा हैं हुआंग? यहां तक कि हुआंग के सामने नहीं आने पर ब्लॉगर्स ने यह आशंका तक जताई है कि उन्हें मार दिया गया है या हिरासत में रखा गया है ताकि संस्थान का सच दुनिया के सामने न आ सके। जब हुआंग को पेशेंट जीरो बताने वाली रिपोर्ट्स सामने आई थीं, उसी महीने चीनी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म Weibo पर खुद को रिसर्चर बनाने वाले एक यूजर ने आरोप लगाया था कि वायरस संस्थान से लीक हुआ है। लैब ने आरोप का खंडन किया और दावा किया कि यह शख्स रिसर्चर नहीं है। चीन छिपा रहा जानकारी? द मेल के मुताबिक चीन में इंटरनेट से हुआंग पर हो रही चर्चा ही गायब कर दी जा रही है। हुआंग का नाम 2013 से 2015 के बीच किए गए तीन रिसर्च पेपर पर छपा है जिनमें से एक स्टफाइलोकोकस बैक्टीरिया पर थी। डेलीमेल ऑनलाइन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पश्चिम की सरकारों और खुफिया एजेंसियां भी हुआंग को ढूंढ नहीं पाई हैं क्योंकि चीन की सरकारी लाइन यही है कि वुहान फसिलटी से वायरस नहीं फैलना शुरू हुआ।


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