Saturday, 23 January 2021

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कायरो मिस्र के 12वें साम्राज्य के चौथे फिरौन सेनुस्रेट ने लाहून के के निर्माण का आदेश दिया। उन्हें फइयाम के शाद्वल क्षेत्र में बहुत दिलचस्पी थी और उन्होंने बार युसफ से मोएरिस झील होते हुए सिंचाई व्यवस्था का विस्तार करना शुरू कर दिया। इस प्रॉजेक्ट का उद्देश्य कृषि योग्य जमीन को बढ़ाना था। उनकी कोशिशों की वजह से यह 13वें साम्राज्य में मिस्र की राजधानी बनी रही। 'अनअर्थ्ड' डॉक्युमेंटरी में बताया गया है कि यह पिरामिड दूसरों से अलग कैसे है। कैसी है संरचना सीरीज में बताया गया है कि इसके आसपास अनोखी खाई है। यह अकेला ऐसा पिरामिड है जिसे देखकर लगता है कि यह पानी पर तैर रहा है। ड्रोन स्कैनिंग अनैलेसिस की मदद से जमीन के नीचे के टनल को एक्सप्लोर किया गया। इसकी मदद से 4000 साल पुराने रहस्यों को जाहिर किया गया। बताया गया है, '1870 ईसा पूर्व में चूनापत्थर पर 160 फीट ऊंचाई पर बनाया गया। ऊपर की ओर काले रंग का ग्रेनाइट लगाया गया जिससे 'स्वर्ग' तक संपर्क किया जाता होगा।' खास है पिरामिड इसके पास एक चोटा पिरामिड है जो फिरौन की रानी के लिए था और 8 पत्थर के मस्तबा मेमोरियल थे। इसके बाहरी ओर मिट्टी की ईंटों से बनी दिवार थी। इसके आस-पास पानी था जिससे लगता था कि यह तैरता हुआ है। पुरातत्वविद सलीमा इकरम का कहना है कि फिरौन ने इसी भ्रम के लिए यह तैयार किया था कि पिरामिड तैर रहा है। उनका कहना है कि उस वक्त लोगों को देखकर लगता होगा कि रेगिस्तार के बीच पिरामिड पानी पर तैर रहा है। उन्होंने बताया है कि शाद्वल की वजह से यहां पानी आता रहता है। इसके निर्माण के लिए मिट्टी की ईंटें इस्तेमाल की गईं और फिर चूनापत्थर लगाया गया। इसके चारों ओर खाई खोदी जाती थीं जिसमें पत्थर डाल दिए जाते थे।


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