इस्लामाबाद कंगाली की दहलीज पर खड़े पाकिस्तान ने भारत से क्रिकेट के मैदान में मुंह की खाने के बाद अब मुकदमेबाजी में 33 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च किया है। इसके बदले में पाकिस्तान को भारत से एक भी रुपया वापस नहीं मिला है। आधिकारिक रिकॉर्ड में खुलासे के बाद पाकिस्तान में सियासी बवाल मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि यह राशि पाकिस्तान के सर्वश्रेष्ठ 192 क्रिकेटरों के योग्यता आधारित स्टाइपेंड के लिए आवंटित किए गए के वार्षिक बजट से 100 फीसदी अधिक है। पाकिस्तानी संसदीय पैनल ने पीसीबी से मांगा जवाब पाकिस्तान के एक संसदीय पैनल ने हाल में ही पीसीबी यानी से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। इसके बावजूद पीसीबी ने किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। पीसीबी के अध्यक्ष एहसान मनी ने खुद स्वीकार किया कि पाकिस्तान के खिलाफ मुआवजे के दावे को पूरा करने में विफल रहा है। पाकिस्तान ने क्यों किया था दावा दरअसल, पाकिस्तान का दावा है कि 2014 में भारत के साथ 6 क्रिकेट सीरीज को लेकर समझौता हुआ था। जिसके बाद भारत ने दोनों देशों के बीच पैदा हुए हालात को देखते हुए इस सीरीज को रद्द कर दिया था। जिसके बाद पाकिस्तान ने दावा किया था कि इसकी तैयारियों में पीसीबी ने 450 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसी को लेकर पीसीबी ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के विवाद समाधान फोरम (DRF) के समक्ष अपील की थी। ने फिर लिया 416 हजार करोड़ रुपये का कर्ज कंगाली की दहलीज पर खड़े पाकिस्तान ने अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए फिर से 1.2 बिलियन डॉलर (87,56,58,00,000 रुपये) का नया कर्ज लिया है। कर्ज की इस नई राशि के साथ चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में पाकिस्तान अब तक 5.7 अरब डॉलर (4,16,01,73,50,000 रुपये) की नई उधारी ले चुका है। सऊदी और यूएई ने भी पाकिस्तान से वापस मांगा कर्ज वहीं प्रधानमंत्री इमरान खान ढाई साल सरकार चलाने के बाद भी देश के खस्ता आर्थिक हालात के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार बता रहे हैं। पाकिस्तान में हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि सरकारी कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए भी इमरान खान सरकार को जोड़ तोड़ करना पड़ रहा है। पाकिस्तान का सबसे बड़ा 'दाता' सऊदी अरब और यूएई अपने कई बिलियन डॉलर के कर्ज को वापस मांग रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त चीन भी अब पाकिस्तान को कर्ज देने में आनाकानी कर रहा है।
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