अंकारा इस्लाम को लेकर दोस्ती की कसमें खाने वाले तुर्की ने पाकिस्तान के 40 नागरिकों को फिर से अपने देश से निकाल दिया है। बताया जा रहा है कि ये पाकिस्तानी नागरिक तुर्की के अलग-अलग शहरों में लंबे समय से अवैध रूप से रह रहे थे। तुर्की ने इन लोगों को वापस इस्लामाबाद भेज दिया है। इससे पहले भी 1 अप्रैल 2019 को तुर्की ने पाकिस्तान के 47 नागरिकों को अवैध रूप से रहने के आरोप में इस्लामाबाद डिपोर्ट कर दिया था। इस्लामाबाद भेजे गए अवैध पाकिस्तानी नागरिक पाकिस्तानी मीडिया एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इन लोगों को तुर्की ने एक स्पेशल फ्लाइट के जरिए इस्लामाबाद भेजा गया था। निर्वासित लोगों को इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर भोजन, कपड़े और जूते मुहैया कराए गए। इसे लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों ने दो एनजीओ की मदद भी ली थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्की की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग एंड स्मगलिंग सेल (एफआईए) ने इन लोगों को पकड़ा था। तुर्की के रास्ते यूरोपीय देशों में अवैध रूप से घुसते हैं पाकिस्तानी पाकिस्तानी तुर्की का यूरोप में अवैध रूप से प्रवेश करने के लिए उपयोग करते हैं। इस दौरान जो पकड़े जाते हैं उन्हें या तो डिपोर्ट कर दिया जाता है या जेल में डाल दिया जाता है। पाकिस्तान के लोगों को यूरोप के देशों में संदेह की नजरों से देखा जाता है। इसलिए वे तुर्की के रास्ते यूरोपीय देशों में प्रवेश करने का प्रयास करते रहते हैं। कश्मीर पर पाक का समर्थन करता है तुर्की तुर्की शुरू से ही कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है। 2020 में ईद उल अजहा पर तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और प्रधानमंत्री से बात करते हुए कश्मीर पर तुर्की के समर्थन का आश्वासन दिया था। एर्दोगन ने तो हदे पार करते हुए कश्मीर की तुलना एक बार फिर फिलिस्तीन से की थी। जबकि, सच्चाई यह है कि कश्मीर पर भारत को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे एर्दोआन तुर्की मे खुद एक कट्टर इस्लामिक तानाशाह के रूप में जाने जाते हैं। भारत विरोधी गतिविधियों का केंद्र बना तुर्की तुर्की अब पाकिस्तान के बाद 'भारत-विरोधी गतिविधियों' का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। अंग्रेजी वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक केरल और कश्मीर समेत देश के तमाम हिस्सों में कट्टर इस्लामी संगठनों को तुर्की से फंड मिल रहा है। एक सीनियर गवर्नमेंट अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्की भारत में मुसलमानों में कट्टरता घोलने और चरमपंथियों की भर्तियों की कोशिश कर रहा है। उसकी यह कोशिश दक्षिण एशियाई मुस्लिमों पर अपने प्रभाव के विस्तार की कोशिश है।
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