विश्व के इतिहास में ऐसी कई महिलाएं रहीं हैं जिन्होंने अपने शासन की मिसाल कायम की है। हालांकि, इनमें से सबसे शक्तिशाली और इस दुनिया से जाने के बाद भी सबसे चर्चित रहीं मिस्र की क्लियोपैट्रा। क्लियोपैट्रा को उनकी खूबसूरती के लिए न सिर्फ उनके शासनकाल में सराहा गया बल्कि उनके मरने के बाद ज्यादातर लोग उन्हें हुस्न के लिए मशहूर मानते रहे। यह बात अलग है क्लियोपैट्रा को अद्वितीय सौंदर्य की मालकिन माना जाता है लेकिन असल में वह कहीं ज्यादा बुद्धिमान और चतुर शासक थीं। यह उनकी धारदार राजनीति, संपर्क बनाने की कला और लगातार बदलाव करने की क्षमता थी जिसने उन्हें प्राचीन दुनिया की अकेली महिला शासक बना दिया।Story of Cleopatra: मिस्र की रानी क्लियोपैट्रा के बारे में कई कहानियां चर्चित हैं और उससे भी ज्यादा भ्रम फैले हैं। उन्हें ज्यादातर लोग खूबसूरती के लिए ही जानते हैं लेकिन उनका व्यक्तित्व कहीं ज्यादा सशक्त और साहसिक था।

विश्व के इतिहास में ऐसी कई महिलाएं रहीं हैं जिन्होंने अपने शासन की मिसाल कायम की है। हालांकि, इनमें से सबसे शक्तिशाली और इस दुनिया से जाने के बाद भी सबसे चर्चित रहीं मिस्र की क्लियोपैट्रा। क्लियोपैट्रा को उनकी खूबसूरती के लिए न सिर्फ उनके शासनकाल में सराहा गया बल्कि उनके मरने के बाद ज्यादातर लोग उन्हें हुस्न के लिए मशहूर मानते रहे। यह बात अलग है क्लियोपैट्रा को अद्वितीय सौंदर्य की मालकिन माना जाता है लेकिन असल में वह कहीं ज्यादा बुद्धिमान और चतुर शासक थीं। यह उनकी धारदार राजनीति, संपर्क बनाने की कला और लगातार बदलाव करने की क्षमता थी जिसने उन्हें प्राचीन दुनिया की अकेली महिला शासक बना दिया।
सिर्फ आकर्षक नहीं, बेहद अक्लमंद थीं क्लियोपैट्रा

क्लियोपैट्रो मूलरूप से कहां की थीं, इस बारे में ज्यादा ऐतिहासिक सबूत नहीं हैं और विचार बंटे हुए हैं। ज्यादातर का मानना है कि वह मेसेडोनिया से थीं जबकि दूसरों का कहना है कि उनकी जड़ें अफ्रीका से जुड़ी थीं। बावजूद इसके उन्होंने खुद को मिस्र की रानी के तौर पर स्थापित किया। वह जिस टोलेमाइक साम्राज्य की आखिरी रानी बनीं, उसमें मिस्र की भाषा बोलने वाली पहली इंसान थीं। बुद्धिमान, योग्य और आकर्षक व्यक्तित्व वाली क्लियोपैट्रा को जनता इतना प्यार करती थी कि मौत की तीन शताब्दियों के बाद भी उनकी पूजा की जाती रही। क्लियोपैट्रा ने कभी परंपराओं को आंख बंद करके नहीं माना बल्कि अपनी जरूरत के मुताबिक बदलाव के साथ चलती रहीं। कहते हैं कि वह देवी आइसिस की तरह तैयार होकर खास समारोहों में पहुंचती थीं ताकि उन्हें शासन का प्राकृतिक हकदार माना जा सके। उनके बात करने के तरीके और वाक्-चातुर्य के आगे लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उनका शासन इस बात का सबूत है कि वह सिर्फ सुंदर या आकर्षक ही नहीं थी बल्कि इससे कहीं ज्यादा चतुर थीं।
जब जूलियस सीजर को कर दिया हैरान

उस काल में सत्ता पर हमेशा खतरा मंडराता रहता था। अपने ही परिवार में तख्तापलट से लेकर विदेशी हमले से बचना होता था। ऐसे में क्लियोपैट्रा ने ताकतवर रोमन शासकों से मजबूत संबंध स्थापित किए। यहां तक कि 49 ईसा पूर्व में उन्होंने सीरिया जाकर एक सेना तैयार की। मिस्र लौटने के बाद उन्होंने अपने भाई और सह-शासक फिरौन टोलमी XIII को चुनौती देने का प्लान बनाया और इसके लिए महान जूलियस सीजर से मिलीं। कहा जाता है कि उनके सेवक अपोलोडोरोस उन्हें चादर में छिपाकर सीधे सीजर तक ले गए। सीजर ने न सिर्फ उनका साथ दिया बल्कि दोनों के नजदीकियां भी कायम हो गईं।
कामयाब नहीं होने की कोई साजिश

इसके बाद क्लियोपैट्रा अपने भाई को सत्ता से हटाकर खुद सिंहासन पर बैठ गईं। कुछ वक्त बाद 47 ईसा पूर्व में उनके और सीजर के बेटे सीजेरियॉन को जन्म दिया जिसे आगे जाकर उनका उत्तराधिकारी बनना था। 44 ईसा पूर्व में सीजर की हत्या के बाद क्लियोपैट्रा ने अपने भाई-बहनों के सत्ता के ख्वाब को पूरा नहीं होने दिया। कहा जाता है कि उनका छोटा भाई टोलमी X1V रहस्यमय तरीके से गायब कर दिया गया था जबकि उनकी बहन आर्सिनो IV को मार्क ऐंटनी के लोगों ने मौत के घाट उतार दिया था। क्लियोपैट्रा सीजेरियॉन के साथ शासन संभालती रहीं। जब ऐंटनी को रोम के पूर्वी प्रांतों का शासक बना दिया तो क्लियोपैट्रा ने फौरन उनसे राजनीतिक संबंध स्थापित कर लिए।
सोने की नाव, चांदी के चप्पू...

ऐंटनी के आमंत्रण पर वह 41 ईसा पूर्व में तारसूस गईं जो आज के तुर्की में स्थित है। बताया जाता है कि वह प्रेम की ग्रीक देवी ऐफ्रोडाइट की तरह तैयार होकर बैंगनी रंग के पालों और चांदी के चप्पुओं वाली सोने की नाव से पहुंची थीं। ऐंटनी के प्रेम की ताकत के साथ क्लियोपैट्रा ने गद्दी पर अपना नियंत्रण और मजबूत किया और मिस्र को आजाद रखा। दोनों के तीन बच्चे हुए जिन्हें आगे चलकर क्लियोपैट्रा ने मिस्र के अलावा ऐसे राज्यों की बागडोर दी जिससे उनके साम्राज्य को और ज्यादा फैलाया जा सके।
मौत के बाद बदला सच?

हालांकि, उनकी मौत के बाद उनके शासन से ज्यादा उनकी छवि चर्चित रही। कहा जाता है कि ऐंटनी के रोमन प्रतिद्वंदी ऑक्टेवियन ने क्लियोपैट्रा के खिलाफ यह प्रॉपगैंडा फैलाया कि वह सिर्फ खूबसूरत ही थीं और अपनी जरूरत के लिए दूसरों को रिझाने का काम करती थीं। साहित्य में सदियों तक उन्हें ऐसी ही महिला की तरह दिखाया जाता रहा जिसे आज भी सच ही मान लिया जाता है। हालांकि, अब इस भ्रम को तोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं। गहन रिसर्च और नकार दी गईं उनकी सफलताओं को लोगों के सामने लाया जा रहा है। जानकारों, इतिहासकारों और मिस्र के विशेषज्ञों का मानना है कि समय आ गया है कि क्लियोपैट्रा के असली व्यक्तित्व और ताकतों को समझा जाए क्योंकि वह न सिर्फ महिलाओं बल्कि सभी नेताओं के लिए बेशुमार सीख समेटे हुए थीं।
(Source: CNN, क्रिस्टोबेल हेस्टिंग्स; Photos: हॉलिवुड फिल्म 'क्लियोपैट्रा' में एलिजाबेथ टेलर)
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