हमारे ब्रह्मांड के ऐसे कई रहस्य हैं जिन्हें कुछ हद तक सुलझा लिया गया है लेकिन हर दिन कोई नई खोज इंसानों के होश उड़ा देती है। एक स्टडी में दावा किया गया है कि अब तक छिपी एक अलग तरह की गुरुत्वाकर्षण तरंग (Gravitational Wave) से जुडे़ सवालों के जवाब मिलते दिख रहे हैं। दरअसल, वैज्ञानिकों को एक सिग्नल मिला है और माना जा रहा है कि यह इन्हीं तरंगों का सबूत है जो 'हम' कि ध्वनि जैसा होता है। जाहिर है, यह ध्वनि नहीं है क्योंकि स्पेस में ध्वनि के पैदा होने के लिए कोई मीडियम मौजूद नहीं होता है। यह सिग्नल गुरुत्वाकर्षण तरंगों के कारण पैदा हो सकता है। (LIGO)Humming of the Universe: वैज्ञानिकों को ऐसे संकेत मिले हैं जो गुरुत्वाकर्षण तरंगों के हमारे ज्ञान को हमेशा के लिए बदल सकते हैं। एक सिग्नल डिटेक्ट किया गया है जो इन तरंगों से आया हो सकता है।

हमारे ब्रह्मांड के ऐसे कई रहस्य हैं जिन्हें कुछ हद तक सुलझा लिया गया है लेकिन हर दिन कोई नई खोज इंसानों के होश उड़ा देती है। एक स्टडी में दावा किया गया है कि अब तक छिपी एक अलग तरह की गुरुत्वाकर्षण तरंग (Gravitational Wave) से जुडे़ सवालों के जवाब मिलते दिख रहे हैं। दरअसल, वैज्ञानिकों को एक सिग्नल मिला है और माना जा रहा है कि यह इन्हीं तरंगों का सबूत है जो 'हम' कि ध्वनि जैसा होता है। जाहिर है, यह ध्वनि नहीं है क्योंकि स्पेस में ध्वनि के पैदा होने के लिए कोई मीडियम मौजूद नहीं होता है। यह सिग्नल गुरुत्वाकर्षण तरंगों के कारण पैदा हो सकता है। (LIGO)
क्या है यह 'आवाज'?

माना जाता है कि अनगिनत खगोलीय प्रक्रियाओं के दौरान पैदा हुईं गुरुत्वाकर्षण तरंगों का बैकग्राउंड कही जाने वाली यह आवाज ब्रह्मांड में गूंजती रहती है लेकिन इसे डिकेक्ट करना लगभग नामुमकिन होता है। हालांकि, यूनिवर्सिटी ऑफ कॉलराडो बोल्डर और NASAGrav कलैबरेशन के ऐस्ट्रोफिजिसिस्ट जोसफ साइमन का कहना है कि डेटा के आधार पर इस आवाज के मजबूत सिग्नल मिले हैं। उन्होंने बताया है कि ये सिग्नल पूरे ऑब्जर्वेशन के दौरान मिला है। इसलिए यह दावा करने के लिए कि यहां कहां से पैदा हुआ है इसे और स्टडी किया जाना है। (Caltech)
कहां से आया यह सिग्नल?

यह सिग्नल गुरुत्वाकर्षण तरंगों से ही आया है, इसकी पुष्टि करने या खारिज करने के लिए अंतरराष्ट्रीय टीमें जुटी हुई हैं। अगर यह वाकई में इन्हीं से आया है तो गुरुत्वाकर्षण तंरगों के खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अहम सफलता होगी। हो सकता है कोई नई प्रक्रिया या खासियत ही मिल जाए। यह सिग्नल एक तरह के मृत तारे पल्सर से आया है। ये ऐसे न्यूट्रॉन स्टार होते हैं जो इस तरह से होते हैं उनके ध्रुवों से रेडियो तंरगों की बीम निकलती है। ये फ्लैश इतने सटीक होते हैं कि इनमें होने वाले बदलाव का इस्तेमाल नैविगेशन और ग्रैविटी पर स्टडी के लिए किया जा सकता है। (Credit: N. Fischer, H. Pfeiffer, A. Buonanno (Max Planck Institute for Gravitational Physics), Simulating eXtreme Spacetimes (SXS) Collaboration)
क्यों अहम है यह खोज?

गुरुत्वाकर्षण तरंगें पल्सर से आने वाले स्गिनल पर असर डालती हैं और इसे ही स्टडी किया जाता है। कई सारे पल्सर में एक साथ होने वाले बदलाव से बैकग्राउंड के संकेत मिलते हैं। वैज्ञानिकों ने कोई खास सिग्नल डिटेक्ट नहीं किया है। उन्होंने एक ऐसी ध्वनि डिटेक्ट की है जो हर पल्सर में अलग है लेकिन उसके फीचर एक से हैं। माना जा रहा है कि हो सकता है कि इन तंरगों का स्रोत एक महाविशाल ब्लैक होल हो। इन तरंगों के आधार पर दो ब्लैक होल्स के विलय से लेकर बिग बैंग के ठीक बाद पैदा हुई तरंगों तक के बारे में आगे चलकर पता लगाया जा सकता है। इन संभावनाओं के चलते यह खोज बेहद खास मानी जा रही है।
from World News in Hindi, दुनिया न्यूज़, International News Headlines in Hindi, दुनिया समाचार, दुनिया खबरें, विश्व समाचार | Navbharat Times https://ift.tt/38Whb0i
via IFTTT
No comments:
Post a Comment