Thursday, 25 February 2021

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डोडोमा अफ्रीका से लेकर भारत तक कहर मचाने वाले टिड्डी दल एक बार फिर से सक्रिय हो गए हैं। अफ्रीकी देश तंजानिया के उत्‍तरी किलिमंजारो इलाके में टिड्ड‍ियों ने भीषण हमला किया है। टिड्डी हमले से किसानों में दहशत का माहौल है। अब उन्‍हें फसल की चिंता खाए जा रही है। वहीं अफ्रीका में टिड्ड‍ियों के तबाही मचाने से यह डर सताने लगा है कि कहीं ये एशिया में पाकिस्‍तान, भारत की ओर न आ जाएं। तंजानिया के जिला आयुक्‍त ओनेस्‍मो बिसवेलू ने कहा कि सिहा जिले में मंगलवार शाम से टिड्डी दल तबाही मचा रहा है। उन्‍होंने कहा कि इन टिड्ड‍ियो से निपटने के लिए सरकार ने कीटनाशक छिड़कने वाला विमान तैनात किया है। उन्‍होंने कहा, 'हम टिड्ड‍ियों को नियंत्रित करने में सफल रहे हैं और फसलों को कम से कम नुकसान हुआ है।' माना जा रहा है कि मौसम बदलने की वजह से पूर्वी और उत्‍तरी अफ्रीका में इन टिड्ड‍ियों का हमला हुआ है। केन्‍या के सामने खाने का संकट पैदा हो गया इससे पहले केन्‍या में इतिहास का सबसे बड़ा टिड्डी हमला हुआ था। करोड़ों टिड्ड‍ियों ने केन्‍या में जमकर तबाही मचाई थी और पूरी फसल को बर्बाद कर दिया था। हालत यहां त‍क हो गई थी कि केन्‍या के सामने खाने का संकट पैदा हो गया था। बता दें कि टिड्डियों की झुंड ने एशिया और अफ्रीका के देशों में पिछले साल से भयानक उत्पात मचाया है। एक जगह से दूसरी जगह पलायन करने वाली टिड्डियां- Locusta migratoia दुनिया में सबसे ज्यादा फैली हैं। इनकी वजह से फसलों को बेहद नुकसान होता। ये इतने भयानक होते हैं कि किसी क्षेत्र में जितना खाना 35,000 लोगों के लिए होता है, उतना ये एक ही दिन में खा जाते हैं। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक ईस्ट अफ्रीका और यमन में इस साल टिड्डियों की वजह से 8.5 अरब डॉलर का हो सकता है। इनसे बचने के लिए आमतौर पर कीटनाशकों या जाल फेंकने का तरीका अपनाया जाता है। अब चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे केमिकल कंपाउंड की पहचान की है जिसकी वजह से टिड्डियां झुंड में उड़ती हैं। इस खोज की मदद से भविष्य में इन्हें झुंड में उड़ने और नुकसान करने से रोका जा सकता है। ये रिसर्च साइंस जर्नल 'नेचर' में प्रकाशित हुई है। गौरतलब है कि भारत के कई हिस्सों, खासकर उत्तरी और उत्तर-पश्चिम के राज्यों में टिड्डियों ने फसलों को खूब बर्बाद किया है। ऐसे झुंड में उड़ती हैं टिड्डियां चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा फेरोमोन (Pheromone) 4-vinylanisole (4VA) पहचाना है जो टिड्डियों के पीछे के पैरों से निकलता है और दूसरी टिड्डियां अपने ऐंटेना से इन्हें डिटेक्ट करती हैं जहां महक को सेंस करने वाले रिसेप्टर होते हैं। जानवरों के शरीर से निकलने वाले फेरोमोन ऐसे केमिकल होते हैं जिनका असर दूसरे जानवरों के व्यवहार पर असर पड़ता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि टिड्डियों के खास फेरोमोन की पहचान के बाद इसकी मदद से अब इन्हें जाल में फंसाना आसान हो सकता है।


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