Saturday, 20 February 2021

https://ift.tt/36CAGd7

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने मंगल पर Perseverance रोवर के साथ एक स्पेशल हेलिकॉप्टर भी भेजा है। Ingenuity नाम का यह हेलिकॉप्टर यह टेस्ट करने के लिए गया है कि लाल ग्रह की सतह और वायुमंडल में रोटरक्राफ्ट टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। रोवर की सफल लैंडिंग के बाद उसमें लगे हेलिकॉप्टर ने अपनी पहली स्टेटस रिपोर्ट भी भेज दी है। कैलिफोर्निया में NASA की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के मिशन कंट्रोल में मंगल के Jezero Crater से भेजा गया सिग्नल रिसीव किया गया है। इसे मंगल का चक्कर काट रहे Mars Reconnaisance Orbiter के जरिए भेजा गया है। अगर उड़ान में सफल रहा तो Ingenuity धरती के अलावा कहीं और ऐसा करने वाला पहला रोटरक्राफ्ट होगा।

Ingenuity Helicopter on Mars: मंगल पर NASA ने अपना पहला हेलिकॉप्टर भेजा है। इसने अपना पहला संदेश भी भेज दिया है। जानें, इस मिशन का पूरा काम क्या है।


मंगल से हेलिकॉप्टर Ingenuity ने NASA को भेजे पहले मेसेज में बताया अपना हाल-चाल, जानें लाल ग्रह पर इसका क्या काम

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने मंगल पर Perseverance रोवर के साथ एक स्पेशल हेलिकॉप्टर भी भेजा है। Ingenuity नाम का यह हेलिकॉप्टर यह टेस्ट करने के लिए गया है कि लाल ग्रह की सतह और वायुमंडल में रोटरक्राफ्ट टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। रोवर की सफल लैंडिंग के बाद उसमें लगे हेलिकॉप्टर ने अपनी पहली स्टेटस रिपोर्ट भी भेज दी है। कैलिफोर्निया में NASA की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के मिशन कंट्रोल में मंगल के Jezero Crater से भेजा गया सिग्नल रिसीव किया गया है। इसे मंगल का चक्कर काट रहे Mars Reconnaisance Orbiter के जरिए भेजा गया है। अगर उड़ान में सफल रहा तो Ingenuity धरती के अलावा कहीं और ऐसा करने वाला पहला रोटरक्राफ्ट होगा।



Ingenuity ने क्या बताया?
Ingenuity ने क्या बताया?

सिग्नल के मुताबिक हेलिकॉप्टर और रोवर में लगा उसका बेस स्टेशन उम्मीद के मुताबिक ऑपरेट कर रहे हैं। हेलिकॉप्टर रोवर के साथ 30-60 दिन तक अटैच रहेगा। रोवर में ही एक इलेक्ट्रिकल बॉक्स है जो हेलिकॉप्टर और धरती के बीच होने वाले संचार को स्टोर करेगा और रूट करेगा। इसे ही बेस स्टेशन नाम दिया गया है। धरती से काम में लगा मिशन कंट्रोल यहां से यह सुनिश्चित करेगा कि मंगल के बेहद सर्द माहौल में हेलिकॉप्टर के इलेक्ट्रॉनिक चलते रहें। इसके लिए उसमें लगे हीटर्स को ऑन-ऑफ किया जाएगा। इसकी बैटरी को भी चार्ज किया जाएगा ताकि हीटर चल सकें और दूसरे काम किए जा सकें। रोवर में लगे-लगे कुछ दिन के अंतराल पर धीरे-धीरे इन्हें चार्ज किया जाएगा। फिलहाल इन्हें रोवर की पावर सप्लाई से चार्ज मिल रहा है। मंगल की सतह पर इसे लॉन्च करने के बाद बैटरी सोलर पैनल स चार्ज होंगी।



कैसे किया जाएगा टेस्ट?
कैसे किया जाएगा टेस्ट?

रोवर से निकलने के बाद मंगल के 30 दिन (धरती के 31 दिन) इसकी एक्सपेरिमेंटल फ्लाइट की कोशिश होगी। अगर यह मंगल की सर्द रातों में सही-सलामत रहा तो टीम पहली फ्लाइट की कोशिश करेगी। मंगल पर रात का तापमान -90 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। NASA के मुताबिक अगर हेलिकॉप्टर टेक ऑफ और कुछ दूर घूमने में सफल रहा तो मिशन का 90% सफल रहेगा। अगर यह सफलता से लैंड होने के बाद भी काम करता रहा तो चार और फ्लाइट्स टेस्ट की जाएंगी। यह पहली बार किया जा रहा टेस्ट है इसलिए वैज्ञानिक इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं और हर पल कुछ नया सीखने की उम्मीद में हैं।



मंगल पर हेलिकॉप्टर का क्या काम?
मंगल पर हेलिकॉप्टर का क्या काम?

मंगल पर रोटरक्राफ्ट की जरूरत इसलिए है क्योंकि वहां की अनदेखी-अनजानी सतह बेहद ऊबड़-खाबड़ है। मंगल की कक्षा में चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ज्यादा ऊंचाई से एक सीमा तक ही साफ-साफ देख सकते हैं। वहीं रोवर के लिए सतह के हर कोने तक जाना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में ऐसे रोटरक्राफ्ट की जरूरत होती है जो उड़ कर मुश्किल जगहों पर जा सके और हाई-डेफिनेशन तस्वीरें ले सके। 2 किलो के Ingenuity को नाम भारत की स्टूडेंट वनीजा रुपाणी ने एक प्रतियोगिता के जरिए दिया था।





from World News in Hindi, दुनिया न्यूज़, International News Headlines in Hindi, दुनिया समाचार, दुनिया खबरें, विश्व समाचार | Navbharat Times https://ift.tt/3btyYMj
via IFTTT

No comments:

Post a Comment

https://ift.tt/36CAGd7

रियाद सऊदी अरब के नेतृत्‍व में गठबंधन सेना ने यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के एक शिविर को हवाई हमला करके तबाह कर दिया है। सऊदी...