पेइचिंग पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में खूनी झड़प के करीब 8 महीने बीत जाने के बाद चीन ने इस हिंसा में मारे गए चीनी सैनिकों के नाम को उजागर कर दिया। चीन की सेना ने बताया कि इस हिंसा में 4 सैन्य अधिकारियों और जवानों की मौत हो गई थी। वहीं एक अन्य बुरी तरह से घायल हो गया था। चीन के विदेश मंत्रालय ने अब इतने समय तक नाम छिपाए रखने पर सफाई दी है। उसने कहा कि सेनाओं के बीच संबंध खराब न हो, इसलिए मारे गए सैनिकों के नाम जारी नहीं किए गए थे। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने शुक्रवार को कहा, 'गलवान घाटी झड़प के बाद चीन ने तनाव को घटाने के लिए संयम बरता था। उसने इसलिए सैनिकों के नाम नहीं बताए ताकि दोनों ही सेनाओं के बीच संबंध खराब न हों। हुआ ने कहा कि उन्होंने चीनी सेना की ओर से जारी रिपोर्ट को कई बार पढ़ा और बहुत दुखी हैं। एक सैनिक चेन होंगजून की जब मौत हुई, उस समय वह पिता बनने वाले थे। वहीं शिआओ सियून ने अपनी गर्लफ्रेंड से शादी करने का सपना देखा था। उन्होंने चीन की संप्रभुता की रक्षा के लिए अपना बलिदान कर दिया।' 'झड़प में 4 सैन्य अधिकारियों और जवानों की मौत हुई' इससे पहले चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने शुक्रवार को पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया कि पिछले वर्ष पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत की सेना के साथ हुई झड़प में उसके 4 सैन्य अधिकारियों और जवानों की मौत हुई थी। चीन की सेना के आधिकारिक अखबार ‘पीएलए डेली’ की शुक्रवार की खबर के मुताबिक, सेंट्रल मिलिट्री कमीशन ऑफ चाइना (सीएमसी) ने उन 4 सैन्य अधिकारियों और जवानों को याद किया और उन्हें विभिन्न उपाधियों से नवाजा जो काराकोरम पहाड़ियों पर तैनात थे और जून 2020 में गलवान घाटी में भारत के साथ सीमा पर संघर्ष में मारे गए थे। ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने ‘पीएलए डेली’ की खबर के हवाले से बताया कि गलवान घाटी में झड़प के दौरान मरने वालों में पीएलए की शिनजियांग सेना कमान के रेजिमेंटल कमांडर क्वी फबाओ भी शामिल थे। भारत और चीन की सेना के बीच सीमा पर गतिरोध के हालात पिछले वर्ष पांच मई से बनने शुरू हुए थे जिसके बाद पैंगांग झील क्षेत्र में दोनों ओर के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसके बाद दोनों ही पक्षों ने सीमा पर हजारों सैनिकों तथा भारी भरकम हथियार एवं युद्ध सामग्री की तैनाती की थी। गलवान घाटी में 15 जून को हुई झड़प के दौरान भारत के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे। राष्ट्रपति के नेतृत्व वाली पीएलए की सर्वोच्च इकाई ने उपाधि दी कई दशकों में भारत-चीन सीमा पर हुआ यह सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष था। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली पीएलए की सर्वोच्च इकाई सीएमसी ने क्वी फबाओ को ‘सीमा की रक्षा करने वाले नायक रेजिमेंटल कमांडर’ की उपाधि दी है। चेन होंगजुन को ‘सीमा की रक्षा करने वाला नायक’ तथा चेन शियानग्रांग, शियो सियुआन और वांग झुओरान को ‘प्रथम श्रेणी की उत्कृष्टता’ से सम्मानित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहला मौका है जब चीन ने यह स्वीकार किया है कि गलवान में उसके सैन्यकर्मी मारे गए थे। उसने उनके बारे में विस्तार से जानकारी भी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से चार सैन्यकर्मी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलवान घाटी में भारत की सेना का सामना करते हुए मारे गए। भारत ने घटना के तुरंत बाद अपने शहीद सैनिकों के बारे में घोषणा की थी लेकिन चीन ने शुक्रवार से पहले आधिकारिक तौर यह कभी नहीं माना कि उसके सैन्यकर्मी भी झड़प में मारे गए। पिछले वर्ष, अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उक्त झड़प में चीन के 35 सैन्यकर्मी मारे गए थे। चीन ने इसलिए अब बताई गलवान के मृतकों की संख्या सिंघुआ विश्वविद्यालय में नैशनल स्ट्रेटेजी इंस्टीट्यूट के अनुसंधान विभाग में निदेशक क्वियान फेंग ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि चीन ने घटना की जानकारी का खुलासा इसलिए किया है ताकि उन भ्रामक जानकारियों को खारिज किया जा सके जिनमें कहा गया था कि उक्त घटना में भारत के मुकाबले चीन को अधिक नुकसान पहुंचा था या फिर झड़प की शुरुआत उसकी ओर से हुई थी। गलवान घाटी में पिछले वर्ष जून में हिंसक झड़प के बाद जब तनाव बहुत बढ़ गया था तब पूर्वी लद्दाख क्षेत्र के ऊंचाई पर स्थित एवं दुर्गम इलाकों में दोनों देशों ने बड़ी संख्या में जंगी टैंक, बख्तरबंद वाहन और भारी भरकम उपकरणों की तैनाती की थी।
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