अमेरिका के एक नैशनल पार्क में हर साल फरवरी में एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है जो किसी कल्पना से कम नहीं। दुनियाभर से हजारों लोग सिर्फ कुछ पलों के लिए यहां 'आग का झरना' देखने आते हैं। कैलिफोर्निया में करीब 1500 फीट ऊंची चट्टान से बहते लावा सी शक्ल लिए Horsetail Fall ऐसा लगता है जैसे किसी ज्वालामुखी से बहता हो। दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ आंखों का धोखा है और दरअसल यहां आग जैसा कुछ नहीं। Yosemite नैशनल पार्क में इसकी एक झलक देखने के लिए फरवरी के 10 दिन तक लोग आते रहते हैं। चंद पलों को आंखों और यादों में कैद करना ऐसा अनुभव है जिसे ये नेचर फटॉग्रफर्स कभी भूल नहीं पाते।Yosemite Horsetail Falls: कैलिफोर्निया के योजमाइट नैशनल पार्क में एक झरने से लावा बहता हुआ दिखता है। इसे देखने के लिए हर साल हजारों लोग पहुंचते हैं।

अमेरिका के एक नैशनल पार्क में हर साल फरवरी में एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है जो किसी कल्पना से कम नहीं। दुनियाभर से हजारों लोग सिर्फ कुछ पलों के लिए यहां 'आग का झरना' देखने आते हैं। कैलिफोर्निया में करीब 1500 फीट ऊंची चट्टान से बहते लावा सी शक्ल लिए Horsetail Fall ऐसा लगता है जैसे किसी ज्वालामुखी से बहता हो। दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ आंखों का धोखा है और दरअसल यहां आग जैसा कुछ नहीं। Yosemite नैशनल पार्क में इसकी एक झलक देखने के लिए फरवरी के 10 दिन तक लोग आते रहते हैं। चंद पलों को आंखों और यादों में कैद करना ऐसा अनुभव है जिसे ये नेचर फटॉग्रफर्स कभी भूल नहीं पाते।
कैसे बनता है 'आग का झरना'?

दरअसल, Horsetail Fall पानी का ही झरना है। सिर्फ रोशनी का ऐसा खेल है जो फटॉग्रफर्स के लिए किसी खजाने से कम नहीं। स्थानिय फटॉग्रफर्स बताते हैं कि करीब चार साल बाद हालात ऐसे रहे हैं कि झरना बहता लावा सा लगा है। नैशनल पार्क के मुताबिक सूरज इस झरने के ठीक सामने अस्त होता है। जब यह एक खास ऐंगल पर होता है जो झरना नारंगी-लाल रंग को दिखने लगता है। इसे देखने के लिए लोगों से कुछ दूर एक खास जगह पर खड़े होने को कहा जाता है। यहां से लावा का रूप लेते झरने की तस्वीर शानदार आती है। इसके साथ गिरती बर्फ और बढ़ा हुआ पानी का बहाव और साफ आसमान हो तो क्या कहने।
देखो और देखते रह जाओ

लोगों का कहना है कि वे इसे देखते हैं तो देखते रह जाते हैं, यह नजारा इतना दिलकश होता है। इसे और भी ज्यादा खास बनाते हैं फरवरी के सिर्फ कुछ खास दिन जिसके बाद यह गायब हो जाता है। इसे देखने के लिए फरवरी के आखिर में मतलब भर की बर्फ होनी चाहिए जिससे झरने में पानी जाता रहे। दिन के वक्त तापमान इतना होना चाहिए कि बर्फ पिघले और आसमान इतना साफ होना चाहिए कि सूरज की किरणें सटीक हों। इन दिनों शाम को करीब 10 मिनट के लिए यह झरना लावा की शक्ल लेता है। पिछले साल सूखी सर्दी के कारण यह नहीं देखा गया था जिससे फटॉग्रफर्स के हाथों मायूसी लगी थी लेकिन इस बार उन्हें खूबसूरत शॉट्स मिले हैं।
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