लंदन ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी ने पुष्टि की है कि कोविड-19 अनुसंधान में शामिल उसकी एक प्रयोगशाला में साइबर हमला हुआ है। फोर्ब्स की जांच में यह बात सामने आई कि हैकरों ने प्रयोगशाला के कई सिस्टमों में सेंधमारी की। यूनिवर्सिटी ने गुरुवार को कहा कि किसी भी नैदानिक अनुसंधान पर ‘कोई प्रभाव नहीं’ पड़ा है। माना जा रहा है कि इस महीने के मध्य में हैकिंग हुई थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के पीछे कौन लोग हैं। बहरहाल, जिस लैब में हैकरों ने सेंधमारी की वह स्ट्रक्चरल बायोलॉजी विभाग है जिसे ‘स्ट्रबी’ के नाम से जाना जाता है। यह लैब प्रत्यक्ष रूप से ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के विकास में शामिल नहीं है। प्रयोगशाला में वैज्ञानिक कोविड-19 कोशिकाओं के कार्य तंत्र के बारे में अध्ययन करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने से रोकने के तरीके में शामिल रहे हैं। फोर्ब्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर हमले में प्रभावित प्रणालियों में जैव रासायनिक नमूने तैयार करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मशीनें शामिल थीं। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के एक प्रवक्ता के हवाले से बताया गया है, ‘हमने समस्या की पहचान कर ली है और अब आगे की जांच कर रहे हैं।’ साइबर हमले की जांच के लिए यूनिवर्सिटी ब्रिटेन में अधिकारियों के साथ काम कर रहा है। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी (जीसीएचक्यू) की एक शाखा नैशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (एनसीएससी) अब इस हमले की जांच करेगा। एक प्रवक्ता के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने ब्रिटेन के सूचना आयुक्त कार्यालय को इस घटना से अवगत करा दिया है। यह साइबर अटैक ऐसे समय में हुआ है जब स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में साइबर हमले में वृद्धि हुई है। अमेरिका, ब्रिटिश और कनाडाई सुरक्षा सेवाओं ने पिछले साल आरोप लगाया था कि संभवत: रूसी खुफिया सेवाओं के हिस्से के रूप में काम कर रहे एक हैकिंग समूह कोविड-19 वैक्सीन के विकास में शामिल संगठनों को निशाना बना रहा है। ब्रिटेन में रूस के राजदूत ने तब इन दावों को खारिज कर दिया था कि उनके देश की खुफिया सेवा ने कोविड-19 वैक्सीन के बारे में जानकारी चुराने का प्रयास किया था।
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