यंगून म्यांमार में सेना की हिंसा न सिर्फ बढ़ती जा रही है बल्कि क्रूरता की घटनाएं हर रोज सामने आ रही हैं। यहां एक सात साल की बच्ची को सुरक्षाबलों ने ओपन फायर कर दिया। यह बच्ची प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई में मारी जाने वाली सबसे छोटी पीड़िता है। सेना ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारी हिंसा कर रहे हैं और उनका दावा है कि कम से कम बल प्रयोग की कोशिश की जा रही है। सैन्य सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि अब तक 164 लोगों की जान गई है और दुख भी जताया है लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि कम से कम 261 लोगों की मौत हो गई है। रॉयटर्स को अधिकारियों ने बताया कि एक सात साल की बच्ची की गोली लगने से मौत हो गई। दरअसल, बच्ची के पिता को निशाना बनाकर गोली चलाई गई थी लेकिन उनकी गोदी में बैठी बच्ची को गोली लग गई। चान म्या थाजी शहर में दो और लोगों को मारा गया है। रात के वक्त कई शहरों में शांतिमार्च भी निकाला गया। सैन्य सरकार की अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कड़ी निंदा की है और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल न करने के लिए कहा गया है। वहीं, सरकार का दावा है कि नवंबर में हुए जो चुनाव आंग सान सू ची ने जीते, वे फर्जी थे। सेना ने दावा किया है कि दोबारा चुनाव कराए जाएंगे लेकि कोई तारीख नहीं दी है और देश में आपातकाल लागू कर दिया है। यूरोपियन यूनियन और अमेरिका ने सोमवार को तख्तापलट में शामिल लोगों के खिलाफ प्रतिबंध लगाए हैं। इन लोगों में सैन्य सरकार के हेड और सेना के कमांडर इन चीफ जनरल मिन आन्ग लायंग का नाम भी शामिल है।
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