न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को उसके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराने के लिए उनकी गंभीरता पर क्वाड समिट ने चीन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने गुरुवार को कहा, ‘मैं अपने सहयोगियों के साथ मिला और हम इस क्षेत्र में चीन को जवाबदेह ठहराने जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, अमेरिका, तथाकथित क्वाड...क्योंकि एक साथ काम करने के लिए हमारे पास लोकतंत्र होना चाहिए।’ बाइडेन ने कहा, ‘जाहिर है, इसने चीन का ध्यान आकर्षित किया है।’ बाइडेन ने 12 मार्च को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जापान के प्रधानमंत्री योशीहिडे सुगा और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ वर्चुअल शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जिसके दौरान इन नेताओं ने ‘लोकतांत्रिक-मूल्यों के साथ स्वतंत्र, खुले, समावेशी, क्षेत्र पर जोर दिया।’ 'शी जिनपिंग के लिए लोकतंत्र की अहमयित नहीं' अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि चीन की योजना विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अपने निवेश के माध्यम से भविष्य में अपनी मजबूत पैठ बनाने की है और कहा कि अमेरिका को इसका मुकाबला करना होगा। उन्होंने कहा, ‘हम बहुत बड़े परिणाम की एक चौथी औद्योगिक क्रांति के बीच में हैं।’ राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले न्यूज कॉन्फ्रेंस में, उन्होंने लोकतंत्र की सुरक्षा और विस्तार को अपने प्रशासन की उच्च प्राथमिकता के रूप में स्वीकार किया कि 21वीं शताब्दी की प्रतियोगिता लोकतंत्र और निरंकुशता के बीच है और यह वो है जो दांव पर है, न कि केवल चीन में बल्कि दुनियाभर की ओर देखिए। बाइडेन ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए लोकतंत्र की अहमयित नहीं है लेकिन वह एक चतुर, होशियार शख्स हैं। वह उन लोगों में से हैं जैसे (रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन, जो सोचते हैं कि निरंकुशता भविष्य की लहर है (और) लोकतंत्र कभी दुनिया में काम नहीं कर सकता है।
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