अमेरिकी स्पेस एसेंजी NASA ने मंगल ग्रह पर भेजे गए Perseverance रोवर में फिट किए गए Ingenuity हेलिकॉप्टर की पहली तस्वीर जारी की है। Ingenuity नाम का यह हेलिकॉप्टर यह टेस्ट करने के लिए गया है कि लाल ग्रह की सतह और वायुमंडल में रोटरक्राफ्ट टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। अगर उड़ान में सफल रहा तो Ingenuity धरती के अलावा कहीं और ऐसा करने वाला पहला रोटरक्राफ्ट होगा। यह पहला मौका है जब धरती से लाखों किलोमीटर दूर लाल ग्रह पर पहुंचे Ingenuity हेलिकॉप्टर की झलक दिखाई दी है। जो तस्वीर जारी की गई है उसमें यह हेलिकॉप्टर परसेवेरेंस रोवर के अंदर एक कवर के अंदर फिट किया गया दिख रहा है। रविवार को नासा ने उस कवर को हटा दिया, जिसके बाद इस हेलिकॉप्टर पर सबकी निगाह गई है। नासा ने इस हेलिकॉप्टर की पहली उड़ान को अगले महीने शेड्यूल किया हुआ है। करीब महीनेभर पहले इस रोवर ने नासा के जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के मिशन कंट्रोल को लैंडिंग के बाद हेलिकॉप्टर की स्टेटस रिपोर्ट भेजी थी। जिसमें इसके सुरक्षित लैंडिंग के बारे में जानकारी दी गई थी। इस संदेश को मंगल का चक्कर काट रहे Mars Reconnaisance Orbiter के जरिए भेजा गया था।अमेरिकी स्पेस एसेंजी NASA ने मंगल ग्रह पर भेजे गए Perseverance रोवर में फिट किए गए Ingenuity हेलिकॉप्टर की पहली तस्वीर जारी की है। Ingenuity नाम का यह हेलिकॉप्टर यह टेस्ट करने के लिए गया है कि लाल ग्रह की सतह और वायुमंडल में रोटरक्राफ्ट टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। अगर उड़ान में सफल रहा तो Ingenuity धरती के अलावा कहीं और ऐसा करने वाला पहला रोटरक्राफ्ट होगा।

अमेरिकी स्पेस एसेंजी NASA ने मंगल ग्रह पर भेजे गए Perseverance रोवर में फिट किए गए Ingenuity हेलिकॉप्टर की पहली तस्वीर जारी की है। Ingenuity नाम का यह हेलिकॉप्टर यह टेस्ट करने के लिए गया है कि लाल ग्रह की सतह और वायुमंडल में रोटरक्राफ्ट टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। अगर उड़ान में सफल रहा तो Ingenuity धरती के अलावा कहीं और ऐसा करने वाला पहला रोटरक्राफ्ट होगा। यह पहला मौका है जब धरती से लाखों किलोमीटर दूर लाल ग्रह पर पहुंचे Ingenuity हेलिकॉप्टर की झलक दिखाई दी है। जो तस्वीर जारी की गई है उसमें यह हेलिकॉप्टर परसेवेरेंस रोवर के अंदर एक कवर के अंदर फिट किया गया दिख रहा है। रविवार को नासा ने उस कवर को हटा दिया, जिसके बाद इस हेलिकॉप्टर पर सबकी निगाह गई है। नासा ने इस हेलिकॉप्टर की पहली उड़ान को अगले महीने शेड्यूल किया हुआ है। करीब महीनेभर पहले इस रोवर ने नासा के जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के मिशन कंट्रोल को लैंडिंग के बाद हेलिकॉप्टर की स्टेटस रिपोर्ट भेजी थी। जिसमें इसके सुरक्षित लैंडिंग के बारे में जानकारी दी गई थी। इस संदेश को मंगल का चक्कर काट रहे Mars Reconnaisance Orbiter के जरिए भेजा गया था।
Away goes the debris shield, and here’s our first look at the helicopter. It’s stowed sideways, folded up and locke… https://t.co/VBoDfLEhq8
— NASA's Perseverance Mars Rover (@NASAPersevere) 1616352701000
अगले महीने Ingenuity हेलिकॉप्टर की पहली उड़ान संभव
नासा ने बताया कि Jezero Crater में एक स्थान को इस हेलिकॉप्टर के लिए हेलिपैड के रूप में चिन्हित किया गया है। Perseverance रोवर अगले कुछ दिन चलने के बाद उस स्थान पर पहुंच जाएगा। जिसके बाद Ingenuity हेलिकॉप्टर के उड़ान को सफलतापूर्वक आयोजित करने की कोशिश की जाएगी। नासा ने बताया है कि इस हेलिकॉप्टर का टेस्ट 7 अप्रैल के पहले होने की संभावना नहीं है। इस पॉइंट पर रोवर के पहुंचने के बाद हमारे पास टेस्ट को पूरा करने के लिए करीब 30 दिन का समय होगा। जिसके अंदर कभी भी ट्रायल शुरू किया जा सकता है। नासा ने बताया कि उड़ान से पहले आसपास की जगह की जांच की जाएगी, क्योंकि मलबे का एक छोटा सा टुकड़ा भी हमारे मिशन को फेल कर सकता है। इसके लिए मंगल का मौसम भी सही होना चाहिए। धरती की अपेक्षा मंगल के मौसम का पूर्वानुमान लगाना बहुत मुश्किल होता है। अगर वहां अचानक मौसम बदल जाए तो हम अपना हेलिकॉप्टर खो सकते हैं। अंतरिक्ष का मौसम सूर्य से आने वाले विकिरण से जुड़ा हुआ है और नासा के अनुसार, यह पल पल बदलता रहता है।
कैसे किया जाएगा Ingenuity हेलिकॉप्टर का टेस्ट?

रोवर से निकलने के बाद मंगल के 30 दिन (धरती के 31 दिन) इसकी एक्सपेरिमेंटल फ्लाइट की कोशिश होगी। अगर यह मंगल की सर्द रातों में सही-सलामत रहा तो टीम पहली फ्लाइट की कोशिश करेगी। मंगल पर रात का तापमान -90 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। NASA के मुताबिक अगर हेलिकॉप्टर टेक ऑफ और कुछ दूर घूमने में सफल रहा तो मिशन का 90% सफल रहेगा। अगर यह सफलता से लैंड होने के बाद भी काम करता रहा तो चार और फ्लाइट्स टेस्ट की जाएंगी। यह पहली बार किया जा रहा टेस्ट है इसलिए वैज्ञानिक इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं और हर पल कुछ नया सीखने की उम्मीद में हैं।
मंगल पर हेलिकॉप्टर का क्या काम?

मंगल पर रोटरक्राफ्ट की जरूरत इसलिए है क्योंकि वहां की अनदेखी-अनजानी सतह बेहद ऊबड़-खाबड़ है। मंगल की कक्षा में चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ज्यादा ऊंचाई से एक सीमा तक ही साफ-साफ देख सकते हैं। वहीं रोवर के लिए सतह के हर कोने तक जाना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में ऐसे रोटरक्राफ्ट की जरूरत होती है जो उड़ कर मुश्किल जगहों पर जा सके और हाई-डेफिनेशन तस्वीरें ले सके। 2 किलो के Ingenuity को नाम भारत की स्टूडेंट वनीजा रुपाणी ने एक प्रतियोगिता के जरिए दिया था।
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