Tuesday, 23 March 2021

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चीन और रूस से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका विध्वंसक टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के अपग्रेडेड वर्जन को नौसेना में शामिल करने जा रहा है। यह मिसाइल इतनी ताकतवर है कि अमेरिका ने पिछले 30 सालों में जितनी भी जंग लड़ी हैं, उन सभी में इस मिसाइल का इस्तेमाल जमकर किया गया है। हाल में ही इसके नए वर्जन ब्लॉक V टॉमहॉक (Block V Tomahawk) का परीक्षण किया गय है। इस दौरान मिसाइल ने पहले से निर्धारित अपने सभी पैरामीटर को पूरा किया है। शीतयुद्ध जमाने की इस मिसाइल में कई बड़े बदलाव कर अमेरिका इसे भविष्य के युद्धों के लिए तैयार कर रहा है। यह वही मिसाइल है, जिससे अमेरिका ने 2017 और 2018 में सीरिया और लीबिया में तबाही मचाई थी। इस मिसाइल ने इराक के खिलाफ खाड़ी युद्ध के दौरान भी अपनी ताकत का लोहा मनवाया था। यह टॉमहॉक अन्य सभी पुराने टॉमहॉक्स से अलग क्यों है और क्या शीत युद्ध के जमाने का यह पुराना योद्धा हाइपरसोनिक मिसाइलों के युग में प्रवेश कर सकता है? जानिए ऐसे ही कई सवालों के जवाब...

Tomahawk Cruise Missile: चीन और रूस से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका विध्वंसक टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के अपग्रेडेड वर्जन को नौसेना में शामिल करने जा रहा है। यह मिसाइल इतनी ताकतवर है कि अमेरिका ने पिछले 30 सालों में जितनी भी जंग लड़ी हैं, उन सभी में इस मिसाइल का इस्तेमाल जमकर किया गया है।


Tomahawk Missile: अमेरिका ने टॉमहॉक मिसाइल को बनाया महाशक्तिशाली, इन 5 तस्वीरों से समझिए नई ताकत

चीन और रूस से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका विध्वंसक टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के अपग्रेडेड वर्जन को नौसेना में शामिल करने जा रहा है। यह मिसाइल इतनी ताकतवर है कि अमेरिका ने पिछले 30 सालों में जितनी भी जंग लड़ी हैं, उन सभी में इस मिसाइल का इस्तेमाल जमकर किया गया है। हाल में ही इसके नए वर्जन ब्लॉक V टॉमहॉक (Block V Tomahawk) का परीक्षण किया गय है। इस दौरान मिसाइल ने पहले से निर्धारित अपने सभी पैरामीटर को पूरा किया है। शीतयुद्ध जमाने की इस मिसाइल में कई बड़े बदलाव कर अमेरिका इसे भविष्य के युद्धों के लिए तैयार कर रहा है। यह वही मिसाइल है, जिससे अमेरिका ने 2017 और 2018 में सीरिया और लीबिया में तबाही मचाई थी। इस मिसाइल ने इराक के खिलाफ खाड़ी युद्ध के दौरान भी अपनी ताकत का लोहा मनवाया था। यह टॉमहॉक अन्य सभी पुराने टॉमहॉक्स से अलग क्यों है और क्या शीत युद्ध के जमाने का यह पुराना योद्धा हाइपरसोनिक मिसाइलों के युग में प्रवेश कर सकता है? जानिए ऐसे ही कई सवालों के जवाब...



कितना खतरनाक है अमेरिका का टॉमहॉक मिसाइल
कितना खतरनाक है अमेरिका का टॉमहॉक मिसाइल

मिसाइल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि दूर से हमलों के लिए टॉमहॉक मिसाइल बहुत ही सटीक हथियार है। इस क्रूज मिसाइल की रेंज 1,250 किलोमीटर से 2,500 किलोमीटर के बीच होती है। अपनी श्रेणी की दूसरी मिसाइलों से अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर ट्रैवल करने वाली टॉमहॉक को समुद्र से पनडुब्बी या युद्धपोतों के जरिए लॉन्च किया जा सकता है। कम ऊंचाई पर होने की वजह से इन्हें रडार भी पकड़ नहीं कर पाते हैं। यही कारण है कि दुश्मनों को इन मिसाइलों के हमले की भनक तक नहीं लग पाती है। टॉमहॉक मिसाइल को अडवांस नैविगेशन सिस्टम के जरिए गाइड किया जाता है। इस मिसाइल की लंबाई 18 फीट 3 इंच (5.56 मीटर) होती है, बूस्टर के साथ लंबाई 5 फीट होती है। मिसाइल की स्पीड 885.139 किलोमीटर प्रति घंटे से 1416.22 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है।



टॉमहॉक मिसाइल में क्या बदलाव कर रहा है अमेरिका
टॉमहॉक मिसाइल में क्या बदलाव कर रहा है अमेरिका

अमेरिक की हथियार निर्माता कंपनी रेथियॉन ने टॉमहॉक ब्लॉक वी वैरियंट के जरिए मिसाइल को एकदम नई क्षमताओं से लैस किया है। यह मिसाइल अब 1600 किलोमीटर की रेंज में समुद्र में गश्त लगा रहे दुश्मन के किसी भी युद्धपोत को निशाना बना सकती है। इस मिसाइल को नए वॉरहेड से भी लैस किया जाएगा। वॉरहेड किसी भी मिसाइल में लगाए गए बारूद या विस्फोटक को कहा जाता है। जिसकी मदद से कोई भी मिसाइल अपने लक्ष्य पर ज्यादा तबाही मचाती है। इसके लिए रेथियॉन नए प्रकार के शक्तिशाली विस्फोटकों को तैयार कर रही है। हालांकि, ये गैर परमाणु वॉरहेड होगा। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, टॉमहॉक मिसाइल की रेंज इंडो पैसिफिक में चीन का सामना करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। क्योंकि, इस इलाके में चीन ने पहले से ही DF-26 और DF-21 मिसाइलों को तैनात कर रहा है। इसमें से DF-26 मिसाइल की रेंज लगभग 2490 किलोमीटर की है, जबकि DF-21 मिसाइल 1335 किलोमीटर दूर कर मार कर सकती है।



अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम से लैस होगी टॉमहॉक मिसाइल
अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम से लैस होगी टॉमहॉक मिसाइल

टॉमहॉक मिसाइल के ब्लॉक वी वैरियंट में अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम लगाया गया है। इस सिस्टम की बदौलत यह मिसाइल न केवल अपने लक्ष्य को बेहद सटीकता के साथ भेद सकती है, बल्कि इसे रोकना भी दुश्मनों के लिए असंभव है। अमेरिकी नौसेना के एक रिटॉयर्ड अधिकारी और हडसन इंस्टीट्यूट के सीनियर फैलो ब्रायन क्लार्क ने कहा कि इसमें अधिक शक्तिशाली कम्यूनिकेशन और नेविगेशन सिस्टम लगाया गया है। जिससे इस मिसाइल पर किसी भी जैमर का प्रभाव नहीं पड़ेगा। अक्सर दुश्मन देश इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की मदद से मिसाइलों और जहाजों के सिस्टम को बंद करने का प्रयास करते हैं, लेकिन इस मिसाइल पर दुश्मन के हमलों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके रडार सिग्नेचर को भी काफी कम रखा गया है, जिसे दुश्मन डिटेक्ट नहीं कर पाएगा। ऐसे मिसाइलों के उपयोग से अमेरिकी नौसेना की ताकत में कई गुना इजाफा होगा। 2017 में, रेथियॉन के टॉमहॉक कार्यक्रम प्रबंधक ने बताया था कि नेविगेशन सिस्टम अपग्रेड से हम जीपीएस के जरिए अपने लक्ष्य को भेदने में सक्षम होंगे।



1 टॉमहॉक मिसाइल की कीमत करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये
1 टॉमहॉक मिसाइल की कीमत करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये

टॉमहॉक मिसाइलें टारगेट तक सीधी रेखा में नहीं जाते, इसलिए इन्हें बीच में मारकर नहीं गिराया जा सकता। अमेरिका ने इन मिसाइलों का सबसे पहले ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म में इस्तेमाल किया गया था। ये मिसाइलें अपने साथ 450 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक ले जा सकते हैं। ये न्यूक्लियर हथियारों को ले जाने में भी सक्षम हैं। हालांकि अमेरिका ने इन्हें न्यूक्लियर इस्तेमाल से अलग रखा है। एक टॉमहॉक मिसाइल की कीमत करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये बैठती है। टॉमहॉक ब्लॉक-2 मिसाइल तो 2500 किमी तक मार कर सकती है। यह मिसाइल बिना बूस्टर के 5.5 मीटर और बूस्टर के साथ 6.5 मीटर तक लंबी होती है। फिलहाल यह मिसाइल अमेरिका और ब्रिटेन की रायल नेवी में तैनात है। ताइवान ने भी अमेरिका से इस मिसाइल की खरीद के लिए समझौता किया है।





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