माना जाता है कि ब्रह्मांड का 25% हिस्सा डार्क मैटर है। इसे देखा नहीं जा सकता लेकिन गुरुत्वाकर्षण के असर से महसूस किया जा सकता है। इन्हें भी सिर्फ तभी समझा जा सकता है जब किसी दिखने वाले मैटर पर इसका असर हुआ हो। वैज्ञानिकों का मानना है कि डार्क मैटर मकड़े के जाल की तरह होता है जो तेजी से बढ़ रहीं गैलेक्सीज को पकड़कर रखता है। हालांकि, यह है क्या, इसे लेकर अभी जवाब नहीं मिला है। अब एक नई थिअरी में 'गोस्ट स्टार्स' के सहारे इसे समझाने की उम्मीद जगी है। दशकों से वैज्ञानिक इसे सुलझाने की कोशिश करते रहे हैं। पिछले साल 2020 में रिसर्चर्स ने इटली में ऐलान किया कि उन्हें वीकली इंटरैक्टिंग मैसिव पार्टिकल्स (WIMPs) की खोज में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉन्स मिले हैं जिनके मिलने की उम्मीद नहीं थी।पिछले साल 2020 में रिसर्चर्स ने इटली में ऐलान किया कि उन्हें वीकली इंटरैक्टिंग मैसिव पार्टिकल्स (WIMPs) की खोज में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉन्स मिले हैं जिनके मिलने की उम्मीद नहीं थी।

माना जाता है कि ब्रह्मांड का 25% हिस्सा डार्क मैटर है। इसे देखा नहीं जा सकता लेकिन गुरुत्वाकर्षण के असर से महसूस किया जा सकता है। इन्हें भी सिर्फ तभी समझा जा सकता है जब किसी दिखने वाले मैटर पर इसका असर हुआ हो। वैज्ञानिकों का मानना है कि डार्क मैटर मकड़े के जाल की तरह होता है जो तेजी से बढ़ रहीं गैलेक्सीज को पकड़कर रखता है। हालांकि, यह है क्या, इसे लेकर अभी जवाब नहीं मिला है। अब एक नई थिअरी में 'गोस्ट स्टार्स' के सहारे इसे समझाने की उम्मीद जगी है। दशकों से वैज्ञानिक इसे सुलझाने की कोशिश करते रहे हैं। पिछले साल 2020 में रिसर्चर्स ने इटली में ऐलान किया कि उन्हें वीकली इंटरैक्टिंग मैसिव पार्टिकल्स (WIMPs) की खोज में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉन्स मिले हैं जिनके मिलने की उम्मीद नहीं थी।
डार्क मैटर से जुड़े

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डॉ. टॉन्गयान लिन का कहना है कि इसके पीछे तीन संभावनाएं हो सकती हैं। दो के मुताबिक ये सूरज से आने वाले पार्टिकल्स या रेडियोऐक्टिव कंटैमिनेंट हो सकते हैं। तीसरे के मुताबिक यह डार्क बोसॉन के कारण हो सकते हैं जिन्हें डार्क मैटर का दूसरा रूप माना जाता है। साइंस लेखक और स्पीक कॉलिन स्टुअर्ट के मुताबिक बोसॉन ऐसे सबअटॉमिक पार्टिकल होते हैं जिनमें फोर्स होती है। जैसे फोटॉन ऐसे बोसॉन होते हैं जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फोर्स कैरी करते हैं। डार्क बोसॉन या तो डार्क मैटर हो सकते हैं या इनकी वजह से डार्क मैटर जैसे आम मैटर पर असर डालते हैं।
नहीं जा सकती रोशनी

अगर आगे की रिसर्च में यह साबित हो सकता है तो हो सकता है डार्क बोसॉन मिलने का पहला संकेत हो। अगर डार्क बोसॉन पर ग्रैविटी का असर होता है तो वे आम मैटर की तरह गुच्छे में बंध सकते हैं। नीदरलैंड्स की रैडबॉड यूनिवर्सिटी के डॉ. हेक्टर ओलिवर्स का कहना है कि ये खुद ही बोसॉन स्टार में ग्रैविटेट हो सकते हैं। इनमें न्यूक्लियर फ्यूजन नहीं होता, इसलिए इनमें रोशनी नहीं पैदा होती और देखे नहीं जा सकते।
क्यों कहते हैं 'गोस्ट'?

ये पारदर्शी भी होंगे जिससे ऑब्जेक्ट्स इनके आर-पार हो सकेंगे। इसीलिए इन्हें 'गोस्ट' कहा गया है क्योंकि आम मैटर और डार्क मैटर के बीच ग्रैविटेशनल इंटरैक्शन न होने के कारण ऐसा लगेगा जैसे दीवार से भूत आर-पार हो रहा हो। ओलिवर्स का कहना है कि बोसॉन स्टार महाविशाल ब्लैक होल जितना बड़ा होने की क्षमता रखा है जो हर गैलेक्सी के केंद्र में होते हैं। हो सकता है इन्हें देखकर ऐस्ट्रोनॉमर्स को देखकर लगे कि ये ब्लैक होल है। इसीलिए अब यह भी खोजा जा रहा है कि मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र में ब्लैक होल है या बोसॉन स्टार।
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