ढाका बांग्लादेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम के नेता मामूनूल हक को एक महिला के साथ पकड़ा गया है। इस महिला का दावा है कि वह मामूनूल की दूसरी पत्नी है। हिफाजत के नेता को शनिवार दोपहर में नारायणगंज में एक होटल के कमरे में स्थानीय लोगों ने पकड़ा जहां वह ठहरा हुआ था। मामूनूल के पकड़े जाने के बाद उसके समर्थक वहां पहुंच गए और उन्होंने जमकर हिंसा करके कट्टरपंथी नेता को छुड़ा लिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने हिफाजत के नेता को न तो हिरासत में लिया है और न ही गिरफ्तार किया है। वे इस बात का पता लगाने गए थे कि होटल में क्या घटना हुई। सोशल मीडिया में शेयर हो रहे वीडियो में नजर आ रहा है कि मामूनूल स्थानीय लोगों से झगड़ा कर रहा है। वह भी यह कहते हुए सुनाई दे रहा है कि महिला उसकी दूसरी पत्नी है। मामूनूल के पकड़े जाने पर हिफाजत के सदस्य गुस्सा हो गए और उन्होंने होटल पर हमला कर दिया और उसमें जमकर तोड़फोड़ की। उन्होंने होटल पर पत्थर भी फेंके ताकि मामूनूल को छुड़ाया जा सके। शाम करीब सात बजे हिफाजत के समर्थक उसे छुड़ा ले गए। वह ढाका के लिए रवाना हो गया है और पुलिस ने उसे अरेस्ट नहीं किया। पुलिस की इतनी भी हिम्मत नहीं हुई कि वह हिफाजत के लोगों के खिलाफ ऐक्शन ले सके। हिफाजत के लोगों ने गिरफ्तार किए जाने की अफवाह के बाद रास्ते को जाम किया और टायर जलाए। मामूनूल ने अपनी पहली पत्नी को आश्वासन दिया एक लीक फोन कॉल में खुलासा हुआ है कि मामूनूल ने अपनी पहली पत्नी को आश्वासन दिया कि जब वह घर पहुंचेंगे तो पूरी बात बताएंगे। स्थानीय लोगों ने बताया कि मामूनूल को होटल के कमरे में दूसरी महिला के साथ पकड़ा गया था। वीडियो में वह यह कहते हुए सुना जा रहा है कि मैं यहां पर छुट्टियां मनाने आया है। इस बीच मामूनूल ने धमकी दी है कि वह इस कथित प्रताड़ना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा। मामूनूल ने हाल ही में मूर्तियों के खिलाफ भी बहुत ही विवादित बयान दिया था। उसने बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की मूर्ति लगाने का विरोध किया था। इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बांग्लादेश यात्रा के विरोध के नाम पर हिफाजत-ए-इस्लाम के कार्यकर्ताओं ने ढाका, नारायणगंज, सिलहट, ब्राह्मणबेरिया, चटगांव सहित पूरे देश में हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की। उग्रवादी संगठन ने सरकारी प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ और आगजनी करने के लिए कौमी मदरसों के बच्चों का इस्तेमाल किया। साथ ही इसने ब्राह्मणबेरिया और चटगांव के सभी सरकारी कार्यालयों, पुलिस स्टेशनों और मंदिरों में तोड़फोड़ की। उन्होंने सार्वजनिक वाहनों और पुलिस पर ईंटों से हमला किया। दो जिलों में स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस ने उन पर गोलियां भी चलाईं। झड़प के दौरान कम से कम 60 पुलिसकर्मी घायल हो गए और 14 लोगों की मौत हो गई।
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