इस्लामाबाद सरकार ने कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेकते हुए दंगों के आरोपी तहरीक-ए-लब्बैक सरगना को रिहा कर दिया है। 12 अप्रैल से लाहौर के कोट लखपत जेल में बंद साद हुसैन रिजवी को रिहा करने का फैसला सोमवार को पाकिस्तानी आंतरिक मंत्री की कट्टरपंथी संगठन के साथ हुई बातचीत के बाद किया गया। इस बैठक में हुए समझौते के अनुसार, पाकिस्तानी सरकार आज संसद के विशेष सत्र में फ्रांसीसी राजदूत के निष्कासन वाले प्रस्ताव पर वोटिंग करवाने जा रही है। समर्थकों को संबोधित कर सकता है पंजाब जेल विभाग के जनसंपर्क अधिकारी अतीक अहमद ने साद हुसैन के आज रिहाई की पुष्टि की है। रिहा होने के कुछ समय बाद साद रिजवी लाहौर के यतीम खाना चौक गया है, जहां वह अपने समर्थकों को संबोधित कर सकता है। सरकार ने पिछले साल नवंबर में साद रिजवी के साथ फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित करने का समझौता किया था। लेकिन, जब समयसीमा पूरी होने के बाद भी इसका फैसला नहीं किया गया तब साद हुसैन अपने समर्थकों के साथ सड़कों पर उतर गया। कौन है साद हुसैन रिजवी खादिम हुसैन रिजवी के आकस्मिक निधन के बाद साद रिजवी तहरीक ए लबैक पाकिस्तान पार्टी का नेता बन गया था। रिजवी के समर्थक, देश के ईशनिंदा कानून को रद्द नहीं करने के लिए सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं। पार्टी चाहती है कि सरकार फ्रांस के सामान का बहिष्कार करे और फरवरी में रिजवी की पार्टी के साथ हस्ताक्षरित करारनामे के तहत फ्रांस के राजदूत को देश से बाहर निकाले। आखिर फ्रांस से क्यों चिढ़े हुए हैं पाकिस्तानी कट्टरपंथी पाकिस्तान के कट्टरपंथी फ्रांस की मैगजीन चार्ली हेब्दो में प्रकाशित किए गए मोहम्मद साहब के विवादित कार्टून से चिढ़े हुए हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस्लामिक आतंकवाद पर दिए गए बयान को लेकर भी पाकिस्तानी संसद में निंदा प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। इतना ही नहीं, पिछले साल अक्टूबर में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने फ्रांसीसी राजदूत को तलब कर विरोध भी जताया था। TLP ने 11 पुलिसकर्मियों को छोड़ा प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी तहरीक ए लब्बैक पाकिस्तान ने सोमवार को इमरान खान सरकार के साथ पहले दौर की बातचीत के बाद 11 पुलिसकर्मियों को रिहा कर दिया। इन पुलिसकर्मियों को समूह ने लाहौर में सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़प के बीच रविवार को बंधक बनाया था। फ्रांस में पिछले साल प्रकाशित एक कार्टून को ईशनिंदा का उदाहरण बताते हुए फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित करने की अपनी मांग पर दबाव बनाने के प्रयास के तहत, प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी तहरीक ए लब्बैक पाकिस्तान ने 11 पुलिस कर्मियों को बंधक बनाया था।
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