अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA एक स्पेसक्राफ्ट तैयार कर रही है जो ऐस्टरॉइड 16 Psyche पर जाएगा। इस क्राफ्ट की टेस्टिंग अब आखिरी चरण में पहुंच गई है। यह ऐस्टरॉइड कभी ग्रह रहे किसी ऑब्जेक्ट की कोर माना जाता है। इस क्राफ्ट को Maxar Technologies ने बनाया है और कैलिफोर्निया की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी में इस पर काम चल रहा है। इसे अगले साल अगस्त में फ्लोरिडा के केप कनेवरल से SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट की मदद से लॉन्च किया जाना है। यह क्राफ्ट सौर ऊर्जा से चलेगा और मंगल-बृहस्पति के बीच मुख्य बेल्ट में स्थित ऐस्टरॉइड 16 Psyche पर 2026 में पहुंचेगा। फोर्ब्स मैगजीन के दावे के मुताबिक इस ऐस्टरॉइड में जितना धातु है वह पूरी दुनिया की इकॉनमी से कई गुना ज्यादा 10, 000 क्वॉड्रिलियन डॉलर (10,000,000,000,000,000,000 डॉलर) की कीमत का हो सकता है।फोर्ब्स मैगजीन के दावे के मुताबिक इस ऐस्टरॉइड में जितना धातु है वह पूरी दुनिया की इकॉनमी से कई गुना ज्यादा 10, 000 क्वॉड्रिलियन डॉलर (10,000,000,000,000,000,000 डॉलर) की कीमत का हो सकता है।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA एक स्पेसक्राफ्ट तैयार कर रही है जो ऐस्टरॉइड 16 Psyche पर जाएगा। इस क्राफ्ट की टेस्टिंग अब आखिरी चरण में पहुंच गई है। यह ऐस्टरॉइड कभी ग्रह रहे किसी ऑब्जेक्ट की कोर माना जाता है। इस क्राफ्ट को Maxar Technologies ने बनाया है और कैलिफोर्निया की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी में इस पर काम चल रहा है। इसे अगले साल अगस्त में फ्लोरिडा के केप कनेवरल से SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट की मदद से लॉन्च किया जाना है। यह क्राफ्ट सौर ऊर्जा से चलेगा और मंगल-बृहस्पति के बीच मुख्य बेल्ट में स्थित ऐस्टरॉइड 16 Psyche पर 2026 में पहुंचेगा। फोर्ब्स मैगजीन के दावे के मुताबिक इस ऐस्टरॉइड में जितना धातु है वह पूरी दुनिया की इकॉनमी से कई गुना ज्यादा 10, 000 क्वॉड्रिलियन डॉलर (10,000,000,000,000,000,000 डॉलर) की कीमत का हो सकता है।
सबसे मूल्यवान

यह क्राफ्ट 21 महीने तक ऐस्टरॉइड की मैपिंग करेगा और इसके फीचर्स को स्टडी करेगा। धरती से करीब 37 करोड़ किमी दूर स्थित यह ऐस्टरॉइड करीब 226 किमी चौड़ा है। न सिर्फ इसका आकार विशाल है बल्कि यह धातुओं से इस कदर बना है कि इसे अब तक खोजा गया सबसे मूल्यवान ऐस्टरॉइड माना जाता है। इसे सबसे पहले 1852 में खोजा गया था। हबल टेलिस्कोप को मिले डेटा के आधार पर यह धातु से बना है जबकि ज्यादातर ऐस्टरॉइड्स में चट्टान या बर्फ ज्यादा होती है। माना जाता है कि इसमें लोहा और निकेल हो सकते हैं। इस आधार पर इसकी कीमत 10,000 क्वॉड्रिलियन डॉलर हो सकती है।
ऐसे करेगा खोज

ऐस्टरॉइड 16 Psyche कैसे बना, इसे लेकर एक थिअरी है कि यह किसी अविकसित ग्रह की कोर हो सकता है। इसकी मदद से ऐस्ट्रोनॉमर्स धरती और दूसरे ग्रहों के बनने की प्रक्रिया को समझ सकते हैं। JPL में स्पेसक्राफ्ट का सोलर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन चैसिस तैयार है जो किसी वैन के आकार है। यह क्राफ्ट का 80% हिस्सा होगा। अगले 1 साल में क्राफ्ट असेंबल हो जाएगा और फ्लोरिडा भेजने से पहले इसे टेस्ट किया जाएगा। नासा का यह मिशन उसके Discovery Program का हिस्सा है। इस प्रोग्राम के तहत कम कीमत के रोबॉटिक स्पेस मिशन तैयार किए जा रहे हैं। क्राफ्ट में ऐस्टरॉइड का चुंबकीय क्षेत्र नापने के लिए मैग्नेटोमीटर, उसकी सतह की तस्वीरें लेने के लिए मल्टिस्पेक्ट्रल इमेजर, सतह किस चीज से बनी है यह देखने के लिए उससे निकलने वाली गामा रेज और न्यूट्रॉन्स के अनैलेसिस के लिए स्पेक्ट्रोमीटर और हाई डेटा-रेट ट्रांसफर लेजर संपर्क के लिए एक्सपेरिमेंटल उपकरण लगे हैं।
क्या लाया जाएगा टुकड़ा?

इसकी कीमत से यह सवाल उठ सकता है कि इसे धरती पर लाना चाहिए लेकिन अगर ऐसा किया गया तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक धरती पर ऐस्टरॉइड मटीरिअल के बाजार में आने से बेशकीमती धातुओं की कीमत अचानक गिर जाएगी। इस तरह की वस्तुओं का खनन, बिक्री करने वाली सभी कंपनियों की वैल्यू गिरने लगेगी और पूरा बाजार बिगड़ जाएगा। यहां तक कि अगर इस ऐस्टरॉइड का एक टुकड़ा भी धरती पर लाया जाता है तो इसे संभालना मुश्किल होगा।' हालांकि नासा की ऐसी कोई योजना है भी नहीं।
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