Sunday, 4 April 2021

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अम्मान के शाही परिवार में सत्ता को लेकर एक बार फिर घमासान होता दिखाई दे रहा है। ने अपने ही सौतेले भाई को तख्तापलट की कोशिश के आरोप में घर में कैद कर दिया है। वहीं, अपने-अपने हितों को साधते हुए अमेरिका, सऊदी अरब और मिस्र खुलकर किंग अब्दुल्ला का समर्थन में आ गए हैं। जॉर्डन एक सुन्नी बहुल देश है, जिसके अमेरिका के साथ भी उतने ही करीबी संबंध हैं, जितने कि सऊदी अरब के साथ। घर में नजरबंद हुए प्रिंस हमजा जॉर्डन ने पूर्व क्राउन प्रिंस हमजा बिन हुसैन ने दावा किया है कि उन्हें घर में नजरबंद कर दिया गया है। हमजा ने बीबीसी को भेजे पांच मिनट के वीडियो में देश में जारी भ्रष्टाचार, राजनीतिक अक्षमता और उत्पीड़न जैसे आरोप लगाए हैं। उन्होंने सरकार या किंग अब्दुल्ला के खिलाफ किसी भी तरह की साजिश में शामिल होने से भी साफ इनकार किया है। प्रिंस पर जॉर्डन मे तख्तापलट का लगा आरोप बता दें कि जॉर्डन की सरकार ने देश की सुरक्षा और स्थिरता का हवाला देते हुए शनिवार को पूर्व मंत्री और शाही परिवार के एक सदस्य के साथ 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस और सेना का आरोप है कि ये लोग विदेशी सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे थे। जॉर्डन को अरब देशों में आमतौर पर सबसे स्थिर देश माना जाता है, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने इस इलाके पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों को भी हैरान किया है। किंग अब्दुल्ला की आलोचना करने पर हुए नजरबंद अपने वकील के जरिए साझा किए गए पांच मिनट के वीडियो में कहा कि आज सुबह जॉर्डन के सशस्त्र बलों के प्रमुख ने मुझसे एक मुलाकात की। जिसमें उन्होंने मुझे सूचित किया कि मुझे घर से बाहर जाने और लोगों के साथ बातचीत करने की अनुमति नहीं है। क्योंकि, मैं जिन बैठकों में शामिल हुआ या सोशल मीडिया पर जो कुछ भी लिखा उससे सरकार या राजा की आलोचना हुई थी। कौन हैं प्रिंस हमजा बिन हुसैन? प्रिंस के पूर्व किंग हुसैन की चौथी पत्नी क्वीन नूर के सबसे बड़े बेटे हैं। क्वीन नूर अमेरिकी नागरिक थीं। प्रिंस हमजा को किंग हुसैन का सबसे पसंदीदा संतान माना जाता है। किंग तो सार्वजनिक तौर पर प्रिंस हमजा को अपनी आंखों का सुकून कहा करते थे। प्रिंस हमजा ने ब्रिटेन के रॉयल मिलिट्री एकेडमी और अमेरिका के हॉर्वर्ड से पढ़ाई की है। उन्होंने काफी समय तक जॉर्डन की सेना में भी काम किया है। साल 1999 में हमजा को जॉर्डन के क्राउन प्रिंस की पदवी दी गई थी। किंग हुसैन की मौत के बाद हमजा हुए अलग-थलग 1999 में किंग हुसैन की मौत के बाद प्रिंस हमजा को जॉर्डन के किंग के रूप में देखा जाने लगा। लेकिन, उनको वर्तमान किंग अब्दुल्ला के सामने कम अनुभवी बताया गया। यही कारण है कि जनता और पूर्व राजा की पहली पसंद होने के बावजूद प्रिंस हमजा जॉर्डन का किंग नहीं बन सके। इस घटना के से किंग अबदुल्ला और क्राउन प्रिंस हमजा के बीच तनाव बढ़ गया था। 2004 में हमजा से वापस लिया गया क्राउन प्रिंस का ताज साल 2004 में किंग अब्दुल्ला ने एकाएक प्रिंस हमजा बिन हुसैन के क्राउन प्रिंस की उपाधि वापस लेकर अपने बेटे को दे दी। इससे उस समय की महारानी क्रिनी नूर को सबसे बड़ा झटका लगा जो प्रिंस हमजा को देश के अगले राजा के रूप में देखना चाहती थीं। हमजा आज भी जॉर्डन में खासे लोकप्रिय हैं। यहां के लोग उनमें आज भी किंग हुसैन की छवि देखते हैं। अमेरिका-सऊदी ने किंग अब्दुल्ला का किया समर्थन जॉर्डन के पारंपरिक सहयोगी देशों में शुमार अमेरिका, सऊदी अरब और मिस्र ने खुलकर किंग अब्दुल्ला के प्रति समर्थन का ऐलान किया है। जॉर्डन, सऊदी अरब और मिस्र समेत अधिकतर सुन्नी बहुल देशों ने कई सालों से शिया बहुल ईरान के खिलाफ गठबंधन बनाए हुए हैं। जॉर्डन का अमेरिका के साथ भी मजबूत संबंध है, इराक युद्ध के दौरान और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ ऑपरेशन में जॉर्डन ने अमेरिका की खुलकर मदद की। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि किंग अब्दुल्ला अमेरिका के एक प्रमुख भागीदार हैं और उन्हें हमारा पूरा समर्थन है।


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