Saturday, 3 April 2021

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लंदन भारत ने देश में टीकाकरण अभियान को तेज करने के लिए के निर्यात पर अस्थायी रूप से रोक लगाई हुई है। इसी बात से दुनियाभर के कई देश भारत से खफा हैं। उनका आरोप है कि इससे करीब 92 गरीब देशों को समय से वैक्सीन की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। जबकि, सच्चाई यह है कि अमेरिका-ब्रिटेन समेत जितने भी धनी देश हैं, उन्होंने पहले से ही वैक्सीन की बड़ी मात्रा पर कब्जा जमाया हुआ है। अमीर ब्रिटेन भारत से मांग रहा 50 लाख वैक्सीन द गार्डियन में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, भारत पर वैक्सीन को लेकर आरोप लगाने वाला ब्रिटेन तो अपनी कुल आबादी के आधे वयस्क नागरिकों को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक दे चुका है। वहीं, वह भारत से करीब 50 लाख और वैक्सीन की मांग कर रहा है, जिसने अपनी कुल आबादी का केवल 3 फीसदी ही वैक्सीनेशन किया हुआ है। सऊदी अरब, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे धनी देशों को पहले ही करोड़ों की संख्या में वैक्सीन की आपूर्ति की जा चुकी है। सीरम की वैक्सीन पर अमीर देशों का कोई अधिकार नहीं दरअसल, भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) में बनाई जा रही ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन पर अमीर देशों का कोई अधिकार ही नहीं है। यह वैक्सीन केवल भारत के लिए भी नहीं है। इसे दुनियाभर के करीब 92 गरीब देशों के लिए बनाया जाना है। हालांकि, अब भारत सरकार कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए देश में वैक्सीनेशन अभियान को तेज करने के लिए इसके निर्यात को कुछ समय के लिए रोका हुआ है। ऐसे सीरम ने की थी वैक्सीन उत्पादन की डील ठीक एक साल पहले ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने कोरोनोवायरस वैक्सीन विकसित करने की दौड़ में सबसे आगे रहते हुए कहा था कि वे किसी भी निर्माता के साथ कहीं भी अपने वैक्सीन के निर्माण का अधिकार देने का इरादा रखते हैं। जिसके बाद दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने एक करार कर इस वैक्सीन के उत्पादन का प्रारंभिक लाइसेंस हासिल किया था। बिल गेट्स के फाउंडेशन ने बिगाड़ी व्यवस्था इसके ठीक एक महीने बाद ही गेट्स फाउंडेशन की सलाह पर ऑक्सफर्ड ने अपने बयान से पलटते हुए यूके की एक मल्टीनेशनल फार्मा ग्रुप एस्ट्राजेनेका के साथ एक्सक्लूसिव राइट्स (विशेषाधिकार) के समझौते पर हस्ताक्षर किया। जिसके बाद सीरम इंस्टीट्यूट को भी एस्ट्राजेनेका के साथ एक नई डील करनी पड़ी। जिसमें सीरम इंस्टीट्यूट को गावी (GAVI) वैक्सीन अलायंस के अंतर्गत गरीब देशों के लिए वैक्सीन का निर्माण करना था। इस अलायंस को दुनियाभर के अमीर देश और गेट्स फाउंडेशन का समर्थन प्राप्त था। 92 गरीब देशों को वैक्सीन देगा भारत इसमें 92 गरीब देश शामिल हैं, जिनमें करीब-करीब दुनिया की आधी आबादी रहती है। इसमें जनसंख्या के हिसाब से भारत का शेयर 35 फीसदी के आसपास होना चाहिए। हालांकि, एक अघोषित समझौते के तहत ऐसी व्यवस्था बनी थी कि सीरम इंस्टीट्यूट घरेलू आपूर्ति के लिए 50 फीसदी टीके का निर्माण करेगा, बाकी के 50 फीसदी वैक्सीन दुनियाभर में निर्यात की जाएगी। ब्रिटेन-कनाडा को भारत से वैक्सीन खरीदने का कोई हक नहीं इस डील में एक क्लाज है कि एस्ट्राजेनेका उन देशों को भी निर्यात की मंजूरी दे सकता है जो इस समझौते में शामिल नहीं हैं। दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील ने सीरम इंस्टीट्यूट से वैक्सीन की आपातकालीन खरीद की। इसे न्यायोचित भी माना जा सकता है, क्योंकि उनके पास दूसरा कोई चारा नहीं था। हालांकि, अमीर देश जैसे ब्रिटेन और कनाडा जो पहले से ही वैक्सीन की बड़ी मात्रा पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं उन्होंने भी सीरम इंस्टीट्यूट से वैक्सीन जो गरीब देशों के लिए बनाई जा रही है, उसमें सेंधमारी करने का कोई अधिकार नहीं है। भारत की अपील के खिलाफ इन्हीं देशों ने किया था विरोध बड़ी बात यह है कि जब वैक्सीन के पेटेंट को लेकर भारत और ब्राजील ने विश्व व्यापार संगठन से अपील की थी तो उसके विरोध में खड़े होने वाले देशों में ब्रिटेन, कनाडा और ब्राजील शामिल थे। भारत और ब्राजील ने तब कहा था कि दुनियाभर में वैक्सीन की तेजी से आपूर्ति के लिए इसके पेटेंट और फार्मास्यूटिकल एकाधिकार को कुछ समय के लिए निलंबित कर देना चाहिए। इससे दुनियाभर की कई कंपनियां बिना किसी बाधा के तेजी से वैक्सीन का निर्माण कर सकेंगी। बाद में ये देश ही भारत से वैक्सीन के लिए गुहार लगाते हुए देखे गए।


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