अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के Perseverance रोवर के साथ मंगल ग्रह पर गया Ingenuity हेलिकॉप्टर कुछ ही दिन में सतह पर होगा। अब तक वह रोवर से जुड़कर चार्ज हो रहा था। रोवर से ही ऊर्जा लेकर अपने थर्मोस्टैट-कंट्रोल्ड हीटर के इस्तेमाल से 45 डिग्री फाहरेनहाइट के तापमान को कायम रखे थे। मंगल की बर्फीली रातों में यह तापमान बनाए रखना अहम होता है ताकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चलते रहें।NASA के मुताबिक अगर हेलिकॉप्टर टेक ऑफ और कुछ दूर घूमने में सफल रहा तो मिशन का 90% सफल रहेगा। अगर यह सफलता से लैंड होने के बाद भी काम करता रहा तो चार और फ्लाइट्स टेस्ट की जाएंगी।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के Perseverance रोवर के साथ मंगल ग्रह पर गया Ingenuity हेलिकॉप्टर कुछ ही दिन में सतह पर होगा। अब तक वह रोवर से जुड़कर चार्ज हो रहा था। रोवर से ही ऊर्जा लेकर अपने थर्मोस्टैट-कंट्रोल्ड हीटर के इस्तेमाल से 45 डिग्री फाहरेनहाइट के तापमान को कायम रखे थे। मंगल की बर्फीली रातों में यह तापमान बनाए रखना अहम होता है ताकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चलते रहें।
रोवर से अलग होकर कई टेस्ट

यह आगे चलकर सौर ऊर्जा से भी चार्ज होगा जो मंगल पर धरती की तुलना में कम है लेकिन इसमें हाई-टेक सोलर पैनल लगे हैं जो यह काम आसान कर देंगे। हालांकि, बाद में इसका तापमान कम रखा जाएगा ताकि बैटरी ज्यादा खर्च न हो। मंगल पर रात को 130 डिग्री F तक तापमान गिर सकता है और पहली रात इसे झेलने के बाद अगले दिन टीम देखेगी कि Ingenuity का प्रदर्शन कैसा रहा। न सिर्फ यह देखा जाएगा कि क्या हेलिकॉप्टर चल रहा है, बल्कि इसके सोलर पैनल, बैटरी की हालत और चार्ज चेक करेगी और अगले कुछ दिन तक इन पैमानों को ही टेस्ट किया जाएगा।
उड़ान का टेस्ट

इस कदम को पूरा करने के बाद इसके रोटर ब्लेड्स को अनलॉक किया जाएगा और इसके मोटर और सेंसर टेस्ट किए जाएंगे। मंगल के 30 दिन (धरती के 31 दिन) बाद इसकी एक्सपेरिमेंटल फ्लाइट की कोशिश होगी। NASA के मुताबिक अगर हेलिकॉप्टर टेक ऑफ और कुछ दूर घूमने में सफल रहा तो मिशन का 90% सफल रहेगा। अगर यह सफलता से लैंड होने के बाद भी काम करता रहा तो चार और फ्लाइट्स टेस्ट की जाएंगी। यह पहली बार किया जा रहा टेस्ट है इसलिए वैज्ञानिक इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं और हर पल कुछ नया सीखने की उम्मीद में हैं।
क्यों है जरूरत?

मंगल पर रोटरक्राफ्ट की जरूरत इसलिए है क्योंकि वहां की अनदेखी-अनजानी सतह बेहद ऊबड़-खाबड़ है। मंगल की कक्षा में चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ज्यादा ऊंचाई से एक सीमा तक ही साफ-साफ देख सकते हैं। वहीं रोवर के लिए सतह के हर कोने तक जाना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में ऐसे रोटरक्राफ्ट की जरूरत होती है जो उड़ कर मुश्किल जगहों पर जा सके और हाई-डेफिनेशन तस्वीरें ले सके। 2 किलो के Ingenuity को नाम भारत की स्टूडेंट वनीजा रुपाणी ने एक प्रतियोगिता के जरिए दिया था।
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