मेलबर्न बेंगलुरु में पिछले साल मार्च से फंसे 73 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ने भारत से आने वाली उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने और जेल की धमकी देने पर अपनी ही सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। दअसल, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कोरोना की मार झेल रहे भारत से यात्रियों के आने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई हुई है। इसे तोड़ने वालों को 5 साल की जेल और लाखों रुपये का जुर्माना लगाने की धमकी दी जा रही है। जिसके बाद इस ऑस्ट्रेलियाई शख्स ने पीएम स्कॉट मॉरिसन की संघीय सरकार के खिलाफ सिडनी की अदालत में मुकदमा कर दिया है। प्रतिबंध को असंवैधानिक बताकर किया केस पिछले साल से बेंगलुरु में फंसे गैरी न्यूमन के वकीलों ने सिडनी की अदालत में दलील दी है कि प्रतिबंध असंवैधानिक है। ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने इतिहास में पहली बार, अपने उन नागरिकों पर वतन वापस लौटने पर रोक लगा दी है जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया लौटने से पहले 14 दिन का समय भारत में बिताया है। सरकार ने धमकी दी है कि ऐसे लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा और उन्हें पांच साल तक की कैद हो सकती है तथा उनपर 66,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना लग सकता है। घर लौटने की स्वतंत्रता का बताया उल्लंघन माइकल ब्रैडली और क्रिस वार्ड ने बुधवार दोपहर को न्यायमूर्ति स्टेफन बुरले के समक्ष आवेदन दायर किया है। एबीसी न्यूज़ ने खबर दी है कि आवेदन कहता है कि राष्ट्रमंडल ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर कार्रवाई की है और स्वास्थ्य मंत्री ग्रेग हंट की घोषणा घर लौटने की स्वतंत्रता का उल्लंघन करती है। बेंगलुरु में फंसा है यह ऑस्ट्रेलियाई नागरिक वार्ड ने कहा कि न्यूमन बेंगलुरु में हैं और घर लौटना चाहते हैं लेकिन हंट की घोषणा की वजह से ऐसा नहीं कर सकते हैं। बुरले ने आदेश दिया कि कार्यवाही तेज की जाए और सुनवाई की आधिकारिक तारीख अगले 24 से 48 घंटे में मुकर्रर की जाए। हंट ने शनिवार को बयान जारी कर कहा था कि भारत से लौटने पर अस्थायी रूप से रोक लगाने की घोषणा राष्ट्रीय मंत्रिमंडल ने की है और भारत में कोविड-19 की खराब हालात को देखकर ऐसा किया गया है। सोमवार से लागू हुआ है प्रतिबंध ऑस्टेलिया का यह फैसला सोमवार से प्रभावी हो गया है और 15 मई को इसकी समीक्षा की जाएगी। भारत कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है और पिछले एक हफ्ते से रोजाना कोरोना वायरस के तीन लाख से अधिक मामले आ रहे हैं।
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