Wednesday, 12 May 2021

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अमेरिकी फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने Pfizer-BioNTech की कोरोना वायरस वैक्सीन को 12 साल या उससे ऊपर के बच्चों को भी लगाने की इजाजत दे दी है। इससे देश में वैक्सिनेशन तेज होने की उम्मीद है। ऐसे में पैरंट्स के मन में भी कई सवाल होते हैं कि वैक्सीन बच्चों पर कितनी कारगर है और क्या यह बड़ों से अलग है? खासकर भारत और कई देशों में जब कोरोना वायरस के नए वेरियंट बच्चों को निशाना बना रहे हैं, तो बच्चों को सुरक्षित कैसे करना है, यह जानना सबसे अहम हो जाता है।

यह जरूर समझा जाता है कि बच्चों को बड़ों की तरह गंभीर बीमारी आमतौर पर नहीं होती लेकिन ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां बच्चों की जान पर खतरा बना है। बच्चों को वैक्सीन लगना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भले ही उन्हें गंभीर समस्या ना आती हो, वे बीमारी के कैरियर हो सकते हैं।


अमेरिका में 12 साल से ऊपर की उम्र के बच्चों के लिए Coronavirus Vaccine को मंजूरी, कितनी सुरक्षित-कितनी जरूरी?

अमेरिकी फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने Pfizer-BioNTech की कोरोना वायरस वैक्सीन को 12 साल या उससे ऊपर के बच्चों को भी लगाने की इजाजत दे दी है। इससे देश में वैक्सिनेशन तेज होने की उम्मीद है। ऐसे में पैरंट्स के मन में भी कई सवाल होते हैं कि वैक्सीन बच्चों पर कितनी कारगर है और क्या यह बड़ों से अलग है? खासकर भारत और कई देशों में जब कोरोना वायरस के नए वेरियंट बच्चों को निशाना बना रहे हैं, तो बच्चों को सुरक्षित कैसे करना है, यह जानना सबसे अहम हो जाता है।



बच्चों के लिए वैक्सीन कितनी सुरक्षित?
बच्चों के लिए वैक्सीन कितनी सुरक्षित?

FDA ने क्लिनिकल ट्रायल में Pfizer की वैक्सीन को सुरक्षित और असरदार पाया। इस ट्रायल में 12-15 साल के 2,260 बच्चों पर टेस्टिंग की गई थी। इनमें से आधे लोगों को बड़ों के बराबर खुराक दी गई थी। सुरक्षा के मामले में इसे 16-25 सालों के टेस्ट के बराबर ही माना गया। कुछ लोगों को कुछ देर के लिए दर्द, थकान, सिरदर्द, ठंड, मांसपेशियों में दर्द, बुखार जैसे साइड इफेक्ट देखे गए। इन्हें आम दवाओं के साथ ठीक भी किया जा सकता है।



बच्चों को क्यों लगवाएं वैक्सीन?
बच्चों को क्यों लगवाएं वैक्सीन?

यह जरूर समझा जाता है कि बच्चों को बड़ों की तरह गंभीर बीमारी आमतौर पर नहीं होती लेकिन ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां बच्चों की जान पर खतरा बना है। बच्चों को वैक्सीन लगना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भले ही उन्हें गंभीर समस्या ना आती हो, वे बीमारी के कैरियर हो सकते हैं। ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां बच्चों से जुड़े कार्यक्रम महामारी फैलने का कारण बने हैं। वहीं, ऐसे कई स्ट्रेन भी सामने आए हैं जो बड़ों की तरह ही बच्चों को अपनी चपेट में ले रहे हैं।



बच्चों के लिए अलग व्यवस्था?
बच्चों के लिए अलग व्यवस्था?

अमेरिका में इस उम्र के बच्चों को वैक्सीन लगाने के लिए अलग से तैयारी नहीं की गई है। उन्हें Pfizer/BioNTech की वैक्सीन ऐसी ही जगहों पर और फार्मेसी में दिया जाएगा जहां बड़ों को। उन्हें ऐसे पीडिऐट्रिक ऑफिसों में भी दिया जाएगा जहां वैक्सीन को सही से स्टोर करने की सुविधा हो। अभी सिर्फ Pfizer/BioNTech की वैक्सीन ही 18 साल से कम के बच्चों को दी जाएगी।



किस देश की क्या तैयारी?
किस देश की क्या तैयारी?

अमेरिका के अलावा Pfizer की वैक्सीन इस उम्र के लोगों को देने के लिए कनाडा और अल्जीरिया में भी इजाजत मिली है। Pfizer का कहना है कि उसने दूसरे देशों में भी वैक्सीन को मंजूरी के लिए डेटा दे दिया है। वहीं, भारत में एक एक्सपर्ट समिति ने 2-18 साल के बच्चों के लिए भारत बायोटेक की Covaxin के दूसरे/तीसरे चरण के लिए ट्रायल की सिफारिश की है। ICMR और भारत बायोटेक ने पहले बताया था कि सामान्य कोरोना मरीजों पर कोवैक्सिन टीका 78 फीसदी तक असरदार है।





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