मॉस्को अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ चल रहे तनाव के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने दुश्मनों को जोरदार धमकी दी है। पुतिन ने विरोधी राष्ट्रों पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनका देश रूसी क्षेत्र के कुछ हिस्सों को हड़पने की कोशिश करने वालों को ‘नॉक आउट’ कर उनका दांत तोड़ देगा। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति पुतिन ने रूसी क्षेत्र के कुछ हिस्सों को हड़पने की कोशिश करने वाले देशों को अप्रत्यक्ष रूप से यह धमकी दी है। डीपीए ने इंटरफैक्स समाचार एजेंसी का हवाला देते हुए बताया, पुतिन ने कहा कि विदेशी दुश्मन रोजाना रूसी क्षेत्रों को छीनने की कोशिश करते हैं। पुतिन ने कहा, ‘हर कोई हमें कहीं काट लेना चाहता है या हमारे किसी हिस्से को काटना चाहता है, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि जो लोग ऐसा करना चाहते हैं, हम उनके दांत तोड़ देंगे हैं, जिससे वे हमें काट न सकें।’ रूस लगातार नई-नई मिसाइलों का परीक्षण कर रहा हालांकि सोवियत संघ के पतन में रूसी क्षेत्र का एक तिहाई हिस्सा चला गया था, लेकिन रूस अभी भी क्षेत्रफल के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश है। रूस ने हाल के सालों में अपनी सेना का आधुनिकीकरण किया है, आधिकारिक आंकड़ों में कहा गया है कि इस साल अकेले राष्ट्रीय रक्षा में 3 ट्रिलियन रूबल (41 अरब से ज्यादा) का निवेश किया जाएगा। रूस लगातार नई-नई मिसाइलों और महाविनाशक हथियारों का परीक्षण कर रहा है। पिछले दिनों ही रूस का यूक्रेन के साथ तनाव चरम पहुंच गया था और पुतिन ने हजारों की तादाद में सैनिक तथा हथियार यूक्रेन की सीमा पर तैनात कर दिए थे। हालांकि बाद में रूस ने यूक्रेन बॉर्डर पर तैनात अपनी सेना को वापस जाने के आदेश दे दिए। माना जा रहा है कि इससे यूरोप में तीसरे विश्वयुद्ध के शुरू होने का खतरा फिलहाल टल गया है। मार्च के अंत से ही रूसी सेना के लगभग एक लाख जवान भारी सैन्य साजोसामान के साथ यूक्रेन की सीमा के नजदीक पहुंच गए थे। रूस की नीयत पर कई देशों ने शक जताया इसके बाद अमेरिका समेत कई यूरोपीय देश खुलकर यूक्रेन के पक्ष में लामबंद हो गए थे। सेना की वापसी का आदेश देते हुए रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू ने सैन्य साजोसामान को इस साल के अंद में एक दूसरे युद्धाभ्यास के लिए वहीं छोड़ने को कहा है। ऐसे में रूस की नीयत पर कई देशों ने शक जताया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस की इस पहल का स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि रूसी सेना के वापस लौटने से क्षेत्र में तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।
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