Monday, 17 May 2021

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पेइचिंग दुनिया की सबसे ज्‍यादा आबादी वाले चीन में दुल्‍हनों का अकाल पड़ गया है। 10 साल में एक बार होने वाली जनगणना में खुलासा हुआ है कि चीन में करीब 3 करोड़ अविवाहित लोग हैं। यह कई देशों की कुल आबादी से भी ज्‍यादा है। दरअसल, चीन में लंबे समय से बेटे को लेकर लोगों में कुछ ज्‍यादा ही चाहत है। चीनी लोगों की यही चाहत अब उनके लिए संकट का सबब बन गई है। इस बीच साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि ताजा जनगणना में लड़कियों की कुल आबादी में थोड़ी बढ़ोत्‍तरी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में लैंगिक असमानता का मुद्दा जल्‍द खत्‍म होने के आसार नहीं हैं। चीन के सातवें राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या आंकड़े के मुताबिक पिछले साल पैदा हुए एक करोड़ 20 लाख बच्‍चों में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। इसके मुताबिक 113.3 लड़कों पर मात्र 100 लड़कियां हैं। चीनी परिवारों में बेटों को लेकर कुछ ज्‍यादा ही इच्‍छा वर्ष 2010 में यह आंकड़ा 118.1 के अनुपात में 100 था। चीन के प्रफेसर स्‍टूअर्ट गिइतेन बास्‍तेन ने कहते हैं, 'चीन में सामान्‍य तौर पर पुरुष उन महिलाओं से शादी करते हैं जो उनसे उम्र में काफी छोटी होती हैं लेकिन जनसंख्‍या के बूढ़ी होने की वजह से और ज्‍यादा बुजुर्ग हो गए हैं। इससे स्थिति और ज्‍यादा खराब हो गई है।' बास्‍तेन ने कहा कि चीनी परिवारों में बेटी की तुलना में बेटों को लेकर कुछ ज्‍यादा ही इच्‍छा रहती है। एक अन्‍य प्रफेसर ब्‍जोर्न अल्‍पेरमान चेतावनी देते हैं कि ये बच्‍चे जब शादी की उम्र तक पहुंचेंगे तब संभावित दुल्‍हनों की भारी किल्‍लत होगी। उन्‍होंने कहा, 'पिछले साल जन्‍मे एक करोड़ 20 लाख बच्‍चों में से 6 लाख बच्‍चों को अपनी उम्र की पत्‍नी के बिना ही रहना पड़ेगा।' चीन ने वर्ष 1979 में एक बच्‍चे की नीति को लागू किया था और उसे वर्ष 2016 में वापस ले लिया गया था। माना जाता है कि इसी नीति की वजह से चीन में लड़कियों को गर्भ में मारने और बेटे को जन्‍म देने को प्रोत्‍साहन मिला। दशकों बाद चीन की जनसंख्या में बढ़ोतरी कम बता दें कि चीन की आबादी 2019 की तुलना में 0.53 प्रतिशत बढ़कर 1.41178 अरब हो गई है। 2019 में आबादी 1.4 अरब थी। हालांकि इसके अगले साल की शुरुआत से घटने का अनुमान है। चीन की सरकार की तरफ से मंगलवार को जारी की गई सातवीं राष्ट्रीय जनसंख्या जनगणना के अनुसार, चीन के सभी 31 प्रांत, स्वायत्त क्षेत्र और नगरपालिका की आबादी 1.41178 अरब थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) के अनुसार, नई जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि चीन जिस संकट का सामना कर रहा था, उसके और गहराने की उम्मीद है, क्योंकि देश में 60 वर्ष से अधिक लोगों की आबादी बढ़कर 26.4 करोड़ हो गई है। एनबीएस ने एक बयान में कहा कि जनसंख्या औसत आयु बढ़ने से दीर्घकालिक संतुलित विकास पर दबाव बढ़ेगा। देश में 89.4 करोड़ लोगों की उम्र 15 से 59 वर्ष के बीच है, जो कि 2010 की तुलना में 6.79 प्रतिशत कम है। चीन के नेताओं ने जनसंख्या को बढ़ने से रोकने के लिए 1980 से जन्म संबंधी सीमाएं लागू की थीं, लेकिन अब उन्हें इस बात की चिंता है कि देश में कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की संख्या तेजी से कम हो रही है और इसके कारण समृद्ध अर्थव्यवस्था बनाने के प्रयास बाधित हो रहे हैं। चीन में जन्म संबंधी सीमाओं में ढील दे दी गई है, लेकिन दंपती महंगाई, छोटे आवास और मांओं के साथ नौकरी में होने वाले भेदभाव के कारण बच्चों को जन्म देने से कतराते हैं।


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