Sunday, 16 May 2021

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पेइचिंग चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बीजिंग और इस्लामाबाद राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के अवसर का फायदा उठाएंगे, जिससे द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक बेहतर संभावनाएं खुल सकें। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी विदेश मंत्री ने शनिवार को अपने पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच अमेरिका के अफगानिस्‍तान छोड़ने वाले हालात को लेकर चर्चा हुई। वांग ने कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच हर मौसम में रणनीतिक सहकारी साझेदारी अद्वितीय है और द्विपक्षीय संबंध देशों के बीच मैत्रीपूर्ण सहयोग का एक मॉडल बन गए हैं। चीनी नेता ने कहा कि राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से पिछले 70 वर्षों में, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के मूल हितों से संबंधित मुद्दों पर एक-दूसरे का द्दढ़ता से समर्थन किया है। वांग ने जोर देकर कहा कि चीन कोविड -19 महामारी का सामना करने के लिए पाकिस्तान के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। चीन के विदेश मंत्री ने कहा, 'बीजिंग कोविड-19 पर चीन, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के विदेश मंत्रियों के वीडियो कॉन्फ्रेंस के परिणामों को लागू करने और क्षेत्रीय आर्थिक सुधार में बड़ी भूमिका निभाने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करने के लिए भी तैयार है। उन्होंने उल्लेख करते हुए कि अफगान मुद्दे पर पाकिस्तान का एक महत्वपूर्ण पारंपरिक प्रभाव है। वांग ने कहा कि चीन अफगानिस्तान में शांति प्राप्त करने के पाकिस्तान के प्रयासों को पहचानता है। कुरैशी ने मंगल पर चीन की तियानवेन -1 के उतरने पर बधाई दी, और कहा कि राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से द्विपक्षीय संबंधों ने उपयोगी परिणाम प्राप्त किए हैं। उन्होंने कहा कि उनका देश दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ संयुक्त रूप से मनाने और चीन के साथ हर मौसम में रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की उम्मीद करता है। कुरैशी ने कोविड -19 के खिलाफ पाकिस्तान की लड़ाई के लिए मजबूत समर्थन के लिए चीन को धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि उनका देश चीन के साथ महामारी विरोधी सहयोग को जारी रखेगा। पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान चीन प्लस मध्य एशिया के विदेश मंत्रियों की बैठक में जारी किए गए अफगान मुद्दे पर संयुक्त बयान की सराहना करता है। यह कहता है कि अमेरिका और नाटो सैनिकों को अफगानिस्तान को व्यवस्थित और जिम्मेदार तरीके से छोड़ना चाहिए और अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाने में समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।


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