करीब 35 साल पहले यूक्रेन के चर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट (Chernobyl Nuclear Power Plant) में विनाशकारी धमाका हुआ था। तब इसे बंद कर दिया गया और एक हिस्सा आज भी बंद है। अब इसके बेसमेंट के एक कमरे में फिर से न्यूक्लियर रिएक्शन होने लगा है। इस कमरे में काफी मलबा भरा है लेकिन इसके अंदर यूरेनियम, जर्कोनियम, ग्रैफाइट और बालू भरा है। ये विस्फोटक के समय लावा की तरह बेसमेंट में चला गया था और फिर FCM (फ्यूल कंटेनिंग मटीरियल) में तब्दील हो गया। अब यहां न्यूट्रॉन स्तर बढ़ने के संकेत मिले हैं जिससे पता लगता है कि FCM में न्यूक्लियर रिएक्शन हो रहा है।ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड में न्यूक्लियर मटीरियल केमिस्ट नील हयात ने साइंस मैगजीन ने बताया है कि Chernobyl Nuclear Power Plant में यह रेडियोऐक्टिव वेस्ट सुलग रहा है लेकिन हो सकता है कि इसमें एक और धमाका हो जाए।

करीब 35 साल पहले यूक्रेन के चर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट (Chernobyl Nuclear Power Plant) में विनाशकारी धमाका हुआ था। तब इसे बंद कर दिया गया और एक हिस्सा आज भी बंद है। अब इसके बेसमेंट के एक कमरे में फिर से न्यूक्लियर रिएक्शन होने लगा है। इस कमरे में काफी मलबा भरा है लेकिन इसके अंदर यूरेनियम, जर्कोनियम, ग्रैफाइट और बालू भरा है। ये विस्फोटक के समय लावा की तरह बेसमेंट में चला गया था और फिर FCM (फ्यूल कंटेनिंग मटीरियल) में तब्दील हो गया। अब यहां न्यूट्रॉन स्तर बढ़ने के संकेत मिले हैं जिससे पता लगता है कि FCM में न्यूक्लियर रिएक्शन हो रहा है।
सुलग रहा है रेडियोऐक्टिव कचरा

न्यूट्रॉन्स यूरेनियम के ऐटम्स से टकराकर उसके न्यूक्लियस में फिशन रिएक्शन (Fission reaction) को जन्म देते हैं। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड में न्यूक्लियर मटीरियल केमिस्ट नील हयात ने साइंस मैगजीन ने बताया है कि यह रेडियोऐक्टिव वेस्ट सुलग रहा है लेकिन हो सकता है कि इसमें एक और धमाका हो जाए। हालांकि, यह धमाका 1986 में हुए धमाके जितना विनाशकारी नहीं होगा। तब हजारों लोगों की मौत हो गई थी और यूरोप के ऊपर रेडियोऐक्टिव बादल जमा हो गए थे।
क्या होगा विस्फोट हुआ तो?

उस घटना के बाद प्लांट के यूनिट 4 रिएक्टर के इर्द-गिर्द एक स्टील और कंक्रीट का पिंजड़ा (Shelter) बनाया गया था और अब अगर धमाका होता है तो वह उसी के अंदर रहेगा। हालांकि, इससे एक बार फिर FCM को हटाने का मिशन मुश्किल हो जाएगा। Shelter काफी पुराना हो चुका है और विस्फोट से फट सकता है। ऐसे में मलबा और रेडियोऐक्टिव धूल यहां जमा हो जाएगी। सेफ्टी प्रॉब्लम्स ऑफ न्यूक्लियर पावर प्लांट्स में सीनियर रिसर्चर मैग्जिम सेवलीव का कहना है कि करीब चार साल से रूम 305/2 में न्यूट्रॉन स्तर बढ़ रहा है और अभी कुछ साल बिना किसी घटना के बढ़ता रहेगा।
कैसे होगा बचाव?

प्लांट के मैनेजर्स के लिए यह एक समस्या है कि कैसे मलबे में जमा टनों रेडियोऐक्टिव मटीरियल तक पहुंच जाए। रेडिएशन इंसानों के लिए बहुत ज्यादा है लेकिन रेडिएशन प्रतिरोधी रोबॉट ड्रिल कर सकते हैं और वहां न्यूट्रॉन सोखने वाली कंट्रोल रॉड इंस्टॉल कर सकता है। यूक्रेन को उम्मीद है कि सितंबर तक इसके लिए विस्तृत प्लान तैयार किया जा सकेगा।
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