Tuesday, 4 May 2021

https://ift.tt/36CAGd7

ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है डार्क मैटर और माना जा रहा है कि अब इनसे जुड़े कई जवाब मिलने की उम्मीद जगी है। हमारी आकाशगंगा से टकराने के रास्ते पर बढ़ रही एक छोटी गैलेक्सी के आगे बढ़ने से सितारों का एक समूह दिखाई दिया है। एक नए मैप को बनाने के दौरान यह खोज की गई है। ये सितारे हमारी आकाशगंगा के एक आर्म के बाहर दिखे हैं। यह Large Magellanic Cloud गैलेक्सी धरती से 1.3 लाख प्रकाशवर्ष दूर है और इसके आगे बढ़ने से पीछे छूटा अंतरिक्ष का मटीरियल दिखने लगा है जिसमें सितारों के अलावा और भी कुछ है।

माना जाता है कि डार्क मैटर से ही ब्रह्मांड का ज्यादातर हिस्सा बना है और इसे सिर्फ गुरुत्वाकर्षण के असर से ऑब्जर्व किया जा सकता है, सीधे देखा नहीं जा सकता।


Milky Way Collision: ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य Dark Matter का खुलेगा राज, नए नक्‍शे में दिखी आकाशगंगा से टकराने वाली गैलेक्सी

ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है डार्क मैटर और माना जा रहा है कि अब इनसे जुड़े कई जवाब मिलने की उम्मीद जगी है। हमारी आकाशगंगा से टकराने के रास्ते पर बढ़ रही एक छोटी गैलेक्सी के आगे बढ़ने से सितारों का एक समूह दिखाई दिया है। एक नए मैप को बनाने के दौरान यह खोज की गई है। ये सितारे हमारी आकाशगंगा के एक आर्म के बाहर दिखे हैं। यह Large Magellanic Cloud गैलेक्सी धरती से 1.3 लाख प्रकाशवर्ष दूर है और इसके आगे बढ़ने से पीछे छूटा अंतरिक्ष का मटीरियल दिखने लगा है जिसमें सितारों के अलावा और भी कुछ है।



दिखता नहीं, महसूस किया जाता है
दिखता नहीं, महसूस किया जाता है

रिसर्चर्स का मानना है कि LMC के पीछे रह गए मटीरियल में सिर्फ सितारे नहीं बल्कि कुछ और भी है जो दिख नहीं रहा। उनका मानना है कि यह डार्क मैटर हो सकता है। माना जाता है कि डार्क मैटर से ही ब्रह्मांड का ज्यादातर हिस्सा बना है और इसे सिर्फ गुरुत्वाकर्षण के असर से ऑब्जर्व किया जा सकता है, सीधे देखा नहीं जा सकता। स्टडी के सह-लेखक यूनिवर्सिटी ऑफ ऐरिजोना के डॉक्टर स्टूडेंट निकोलस गारावीटो कमार्गो का कहना है कि यह डार्क मैटर हो सकता है जो सितारों को अपने साथ ले जा रहा है।



डार्क मैटर पर सवाल?
डार्क मैटर पर सवाल?

डार्क मैटर के असर से गैलेक्सी के घूमने के बाद भी सितारे और ग्रह अंतरिक्ष में इधर-उधर बहने नहीं लगते हैं। रिसर्चर्स को उम्मीद है कि इसे स्टडी करके डार्क मैटर को भी समझा जा सकता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ऐस्ट्रॉनमी प्रफेसर चार्ली कॉनरॉय का कहना है कि यह किसी नाव के चलने के जैसा है। उनका कहना है कि किसी नाव के आगे बढ़ने से पीछे बने रास्ते के आधार पर समझा जा सकता है कि नाव पानी में चल रही है या शहद में। इसी आधार पर डार्क मैटर को समझने की कोशिश की जा सकती है।



कब होगी टक्कर?
कब होगी टक्कर?

नए मैप और दूसरे रिसर्चर्स के बनाए मॉडल के आधार पर टीम डार्क मैटर की थिअरी को साबित करने के काम में लगे हैं। यह मैप अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA और यूरोपियन स्पेस एजेंसी ESA के टेलिस्कोप से मिले डेटा के आधार पर तैयार किया गया है। इससे यह भी पता चलता है कि यह गैलेक्सी धीमी गति से आकाशगंगा की ओर बढ़ रही है और इसकी कक्षा कम होती जा रही है। यह 2 अरब साल बाद आकाशगंगा से टकराएगी। दो गैलेक्सीज का विलय ब्रह्मांड में एक आम घटना है। आकाशगंगा 8 अरब साल पहले भी एक छोटी गैलेक्सी से टकरा चुकी है।





from World News in Hindi, दुनिया न्यूज़, International News Headlines in Hindi, दुनिया समाचार, दुनिया खबरें, विश्व समाचार | Navbharat Times https://ift.tt/3ux8W2M
via IFTTT

No comments:

Post a Comment

https://ift.tt/36CAGd7

रियाद सऊदी अरब के नेतृत्‍व में गठबंधन सेना ने यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के एक शिविर को हवाई हमला करके तबाह कर दिया है। सऊदी...