Wednesday, 26 May 2021

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दमिश्क दुनियाभर के देशों के बीच युद्ध का मैदान बड़े में बुधवार को राष्ट्रपति पद के लिए मतदान हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मतदान केंद्रों पर पहुंचे और अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पिछले 10 साल से हिंसा में घिरे इस देश में यह दूसरा राष्ट्रपति चुनाव है। इसमें मुख्य उम्मीदवार वर्तमान राष्ट्रपति ही माने जा रहे हैं। विपक्षी पार्टियों ने चुनाव को खारिज किया बसर अल असद को दुनियाभर में तानाशाह राजनेता के तौर पर देखा जाता है। यही कारण है कि सीरिया की विपक्षी पार्टियों ने इस चुनाव को खारिज किया है। असद को रूस के खुले समर्थन के कारण अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने भी इस चुनाव की सत्यता और प्रमाणिकता पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि असद के सत्ता पर काबिज रहते सीरिया में निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। किसकी जीत की ज्यादा संभावना? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीरिया में हो रहे राष्ट्रपति चुनाव में ज्यादा आसार हैं कि राष्ट्रपति बशर असद को चौथी बार सात वर्ष का कार्यकाल मिल सकता है। पिछले पांच दशक से इस पद पर असद के परिवार के सदस्य ही काबिज रहे हैं। राष्ट्रपति पद के लिए इस बार दो और उम्मीदवार मैदान में हैं जिनके नाम हैं अब्दुल्ला सालौम अब्दुल्ला और महमूद अहमद मैरी। लेकिन यह प्रतिस्पर्धा सांकेतिक ही मालूम पड़ती है। सीरिया के कई इलाकों में नहीं हुआ मतदान सुबह सात बजे से हजारों की संख्या में लोग दश्मिक के मतदान केंद्रों पर वोट डालने पहुंचे। यहां की सड़कों पर असद के समर्थन में पोस्टर और बैनर हर ओर नजर आते हैं। बीच में अन्य उम्मीदवारों का एकाध पोस्टर भी दिख जाता है। उत्तरपूर्वी सीरिया में मतदान नहीं होगा क्योंकि यहां पर अमेरिका समर्थित कुर्दिश लड़ाकों का नियंत्रण है और न ही उत्तर पश्चिमी इदलिब प्रांत में मतदान हो रहा है, जहां पर विद्रोहियों का कब्जा है। वहीं दक्षिणी प्रांत दारा और स्वीडा समेत सरकार के नियंत्रण वाले कई क्षेत्रों में लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया है। अमेरिका नहीं देगा इस चुनाव को मान्यता बाइडन प्रशासन ने कहा है कि वह सीरिया में चुनाव के परिणाम को तब तक मान्यता नहीं देगा जब तक कि संयुक्त राष्ट्र और सीरियाई समाज के सभी प्रतिनिधियों की निगरानी में निष्पक्ष मतदान नहीं होता। विदेशों में रहने वाले सीरियाई लोगों ने पिछले हफ्ते मतदान किया था। यहां पर असद वर्ष 2000 से सत्ता में हैं। इससे पहले 30 वर्ष तक यहां उनके पिता हाफेज का शासन था।


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