सूरज की सतह पर लगातार विस्फोट होते हैं रहते हैं। कई बार इनके शक्तिशाली होने पर इनसे निकला प्लाज्मा और इलेक्ट्रिकली चार्ज्ट पार्टिकल धरती पर भी आ जाते हैं। इसलिए इन्हें स्टडी करने के लिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA और यूरोपियन स्पेस एजेंसी ESA ने फरवरी 2020 में एक सोलर ऑर्बिटर लॉन्च किया था। सूरज से निकलने वाले कोरोनल मास इजेक्शन (CME) पर नजर रख रहा या क्राफ्ट इस साल फरवरी में सूरज के करीब पहुंचा और इसने 2 CME के वीडियो कैद कर लिए।सूरज में होने वाले विस्फोट से निकल रहे इन पार्टिकल्स आमतौर पर जब धरती के वायुमंडल से टकराते हैं तो Aurora के रूप में इनका असर दिखाई देता है। हालांकि, अगर ये तूफान तेज हों तो धरती के लगभगर हर शहर से बिजली गुल हो सकती है।

सूरज की सतह पर लगातार विस्फोट होते हैं रहते हैं। कई बार इनके शक्तिशाली होने पर इनसे निकला प्लाज्मा और इलेक्ट्रिकली चार्ज्ट पार्टिकल धरती पर भी आ जाते हैं। इसलिए इन्हें स्टडी करने के लिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA और यूरोपियन स्पेस एजेंसी ESA ने फरवरी 2020 में एक सोलर ऑर्बिटर लॉन्च किया था। सूरज से निकलने वाले कोरोनल मास इजेक्शन (CME) पर नजर रख रहा या क्राफ्ट इस साल फरवरी में सूरज के करीब पहुंचा और इसने 2 CME के वीडियो कैद कर लिए।
Solar Orbiter ने क्या देखा?

इस साल 10 फरवरी को सोलर ऑर्बिटर सूरज के 7.7 करोड़ किलोमीटर पास तक पहुंचा। यह धरती से सूरज के बीच की दूरी का आधा है। इसमें तीन इमेजिंग इंस्ट्रुमेंट लगे हैं जिससे सूरज के पास से ठंडे स्पेस में जाते वक्त प्रोब ने दो वीडियो लिए। पहले इंस्ट्रुमेंट ने सूरज को रिकॉर्ड किया और दूसरे ने सूरज के कोरोना या बाहरी वायुमंडल से निकलने वाली ऊर्जा को। तीसरे इमेजर ने विस्फोट से निकलकर स्पेस में जाते हुए इलेक्ट्रिकली चार्ज्ड पार्टिकल्स, धूल और खगोलीय किरणों को कैद किया। (क्रेडिट: ESA & NASA/Solar Orbiter/SoloHI team/NRL)
धरती पर इसका क्या असर?

सूरज में होने वाले विस्फोट से निकल रहे इन पार्टिकल्स आमतौर पर जब धरती के वायुमंडल से टकराते हैं तो Aurora के रूप में इनका असर दिखाई देता है। हालांकि, अगर ये तूफान तेज हों तो धरती के लगभगर हर शहर से बिजली गुल हो सकती है। साल 1989 में आए सौर तूफान की वजह से कनाडा के क्यूबेक शहर में 12 घंटे के के लिए बिजली गुल हो गई थी। इसी तरह से वर्ष 1859 में आए चर्चित सबसे शक्तिशाली जिओमैग्नेटिक तूफान ने यूरोप और अमेरिका में टेलिग्राफ नेटवर्क को तबाह कर दिया था। इस दौरान कुछ लोगों को इलेक्ट्रिक झटके लगे तो कहीं बैट्री के बिना उपकरण चलने लगे।
वैज्ञानिकों का कहना है कि आज के समय में कंप्यूटर और ऑटोमेशन पर दुनिया बहुत ज्यादा निर्भर हो गई है। ऐसे में पिछले तूफान के मुकाबले इस बार सौर तूफान से परिणाम ज्यादा भयावह हो सकता है। सौर तूफान आने पर हमारे अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे सैटलाइट प्रभावित हो सकते हैं और इससे हमारी संचार और जीपीएस प्रणाली ठप पड़ सकती है।
अभी कई रहस्य उलझे

सोलर ऑर्बिटर मिशन पर काम कर रहे ESA के वैज्ञानिक यानीस जूगानेलीस का कहना है, 'हम सोलर ऑर्बिटर की मदद से समझना चाहते हैं कि सूरज कैसे सौर मंडल के पर्यावरण को लगातार बनाता है और कंट्रोल करता है। हमारे सितारे के बारे में कुछ रहस्य हैं जिनके जवाब हमें नहीं मिले हैं।' अगले 6 साल में सोलर ऑर्बिटर सूरज के ध्रुवों के और करीब जाएगा जहां पहले कोई प्रोब नहीं गया है। उम्मीद है कि पहली बार धरती को वहां की तस्वीरें भी भेजेगा।
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