Wednesday, 5 May 2021

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लंदन भारतीय विदेश मंत्री ने लद्दाख में तनाव और कार्गो विमानों की आवाजाही को प्रतिबंधित करने को लेकर चीन को खूब सुनाया है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के संबंध अभी सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। जयशंकर ने यह भी कहा कि सीमा पर संघर्ष, जबरदस्ती, धमकी और खूनखराबा हो और हम यह कहें कि दूसरे क्षेत्रों में हमारे संबंध मजबूत हैं, यह नहीं हो सकता है। चीनी विदेश मंत्री के साथ जयशंकर ने की बैठक ब्रिटेन स्थित मीडिया संगठन इंडिया इंक ग्रुप और लंदन में भारतीय उच्चायोग की वैश्विक संवाद श्रृंखला के एक कार्यक्रम में जयशंकर ने बताया कि उनकी चीनी विदेश मंत्री के साथ हाल में ही एक अच्छी बातचीत हुई है। जिसमें भारत में कोरोना महामारी के दौरान रणनीतिक सामान की आवाजाही में ढील देने के संदर्भ में सकारात्मक चर्चा हुई है। कार्गो फ्लाइट बैन से भारतीय कंपनियों को नहीं मिल रहा ऑर्डर उन्होंने कहा कि पिछली वार्ता काफी हद तक कोविड-19 महामारी पर केंद्रित थी और मेरी चर्चा का विषय था कि कोविड-19 निश्चित रूप से कुछ बड़ा है और यह हमारे साझे हित में है कि इससे निपटने के लिए मिलकर काम करें और यही बात विदेश मंत्र वांग यी ने भी मुझसे कही। जयशंकर ने यह भी बताया कि भारतीय कंपनियों को चीन से ऑर्डर प्राप्त करने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चीनी मंत्री को संदेश दिया कि वह सबसे बेहतर मदद इस प्रक्रिया में राहत देकर कर सकते हैं। बोले- बातचीत के बाद चीन ने दी कुछ ढील जयशंकर ने कहा कि हमारी बातचीत के बाद चीजें आगे बढ़ी हैं। हमारी कुछ विमानन कंपनियों को तुरंत वहां जाने की अनुमति मिली। कड़ी बढ़ रही है जो बहुत प्रशंसनीय है। वृहद स्तर पर भारत-चीन संबंधों के बारे में मंत्री ने कहा कि सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया चल रही है लेकिन अब तक सीमा के इच्छित स्थान तक उनकी वापसी नहीं हुई है। लद्दाख तनाव पर बोले- भारत-चीन संबंध सबसे मुश्किल दौर में लद्दाख में जारी तनाव को लेकर जयशंकर ने कहा कि इस समय हमारे रिश्ते मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं क्योंकि समझौतों का उल्लंघन हुआ है और यह समझ है की चीन ने अपनी ओर से गत कई सालों में भारी सैन्य तैनाती बिना किसी कारण के वास्तविक नियंत्रण रेखा पर की है। उन्होंने बताया कि चीनी सेना एक साल से हैं और उनकी गतिविधि से सीमावर्ती इलाकों में शांति और संयम भंग होता है। हमने 45 साल के बाद जून में वहां खून खराबा देखा। खूनखराबे के बीच दूसरे क्षेत्रों में नहीं बन सकते अच्छे संबंध जयशंकर ने कहा कि भारत का बहुत साफ रुख है कि पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और संयम बहुत जरूरी है। संघर्ष, जबरदस्ती, धमकी और खूनखराबा सीमा पर हो और फिर आप कहे कि दूसरे क्षेत्रों में अच्छे संबंध बनाए हैं। यह वास्तविक नहीं है। वह ऐसा कुछ है जिसपर हम कायम है और चीनी पक्ष के साथ चर्चा कर रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में हमने प्रगति की है और कुछ क्षेत्रों में अब भी चर्चा चल रही है। लेकिन हम तनाव कम करने के स्तर पर नहीं पहुंचे है जो सैनिकों की वापसी के बाद ही आ सकती है। लद्दाख में अभी भी तनाव जारी गौरतलब है कि भारत और चीन की सेना के बीच गत साल मई से ही पूर्वी लद्दाख के कई स्थानों पर गतिरोध बना हुआ है। कई दौर की कूटनीतिक और सैन्य स्तर की वार्ता के बाद फरवरी में पैगोंग झील के उत्तरी और दक्षिण किनारे से चीनी सैनिक और उनके साजो सामान पीछे हटे। अब दोनों पक्ष गतिरोध के अन्य स्थानों से सैनिकों के पीछे हटने पर चर्चा कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जयशंकर इस समय जी-7 समूह के विदेश एवं विकास मंत्रियों की बैठक में बतौर मेहमान मंत्री शामिल होने के लिए ब्रिटेन में हैं।


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