वॉशिंगटन/मास्को दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियों अमेरिका और रूस के राष्ट्राध्यक्ष राष्ट्रपति जो बाइडन और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आगामी 16 जून को G7 देशों की बैठक के बीच स्विटजरलैंड में मुलाकात करने जा रहे है। दोनों धुर विरोधी नेताओं की इस मुलाकात पर दुनिया की नजरें टिक हुई हैं। इस बीच विशेषज्ञों का मानना है कि बाइडन और पुतिन के बीच मुलाकात भारत के लिए बेहद अच्छी खबर है जो इन दिनों पूर्वी लद्दाख में चीनी धौंस का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार सी राजामोहन ने अमेरिकी पत्रिका फॉरेन पॉलिसी में लिखे अपने लेख में कहा कि भारत इस मुलाकात से बेहद खुश है। भारत को आशा है कि इस मुलाकात से दोनों नेताओं के साथ चलने का रास्ता साफ हो सकता है। राजामोहन ने कहा कि अमेरिका और रूस के बीच अच्छे रिश्तों से निश्चित रूप से भारत के लिए आक्रामक चीन को संतुलित करना आसान हो जाएगा। 'भारत खुद को एशिया में अकेला नहीं महसूस करेगा' राजामोहन ने कहा कि रूस और अमेरिका के बीच संबंधों में सुधार से भारत खुद को एशिया में अकेला नहीं महसूस करेगा। कई देशों का मानना है कि चीन और अमेरिका में बढ़ते तनाव के बीच रूस उनके लिए बातचीत की संभावना को पैदा करेगा। वहीं कई ऐसे भी हैं जो यह महसूस करते हैं कि अमेरिका और रूस दोनों ही शिखर बैठक को लेकर लगी उम्मीदों को कम करके दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि अमेरिका और रूस के बीच संबंधों में कई कठिन मुद्दे आगे भी आते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बाइडेन अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के शुरुआती दिनों में पुतिन के साथ बैठक करके दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को फिर से पटरी पर लाया जा सके। बाइडन रूस के साथ संबंध सुधारकर पुतिन से बड़ा खतरा बन चुके चीनी ड्रैगन पर नकेल कसना चाहते हैं। साथ ही वह यूरोप को भी चीन पर काबू पाने के लिए अपने साथ लाना चाहते हैं। बाइडन उस अमेरिकी सोच को बदलना चाहते हैं जिसमें कहा जाता है कि अमेरिका रूस और चीन के साथ एक साथ निपट सकता है। रूस को साधने में जुटे जापान और भारत अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ ने कहा कि परंपरागत समझ यह है कि मास्को और पेइचिंग अब आपस में काफी जुड़े हुए हैं और बाइडन प्रशासन अगर दोनों को अलग करना चाहता है तो उसके लिए यह बहुत कठिन होगा। हालांकि रूस के साथ तनाव कम होने पर यूरोप के देश एशिया पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे और चीन को संतुलित करने के अमेरिकी प्रयासों को पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। भारत और जापान यूरोपीय शक्तियों खासतौर पर ब्रिटेन को एक बार फिर से एशिया की सुरक्षा व्यवस्था में लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और जापान दोनों ही चाहते हैं कि रूस चीनी आक्रामकता के बीच में एशिया में न केवल एक स्वतंत्र भूमिका निभाए बल्कि जरूरत पड़े तो हिंद प्रशांत क्षेत्र में संतुलन स्थापित करे। नई दिल्ली, टोक्यो और मास्को ट्रैक 2 बातचीत कर रहे हैं ताकि तीनों देशों के बीच में एक समान समझ विकसित किया जा सके। बता दें कि जी7 देशों की बैठक से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने जी-7 शिखर सम्मेलन में लोकतांत्रिक देशों पर बंधुआ मजदूरी प्रथाओं को लेकर चीन के बहिष्कार का दबाव बनाने की योजना तैयार की है। सम्मेलन के दौरान ये देश विकासशील देशों में चीन के प्रयासों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक बुनियादी ढांचा योजना की शुरुआत करेंगे।
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