Friday, 25 June 2021

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इस्लामाबाद पाकिस्तान के बड़बोले प्रधानमंत्री ने अब अमेरिका को इशारों-इशारों में अक्षम राष्ट्र करार दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की पिछली सरकारों ने अमेरिका को वो सब दिया, जिसे वह खुद करने में सक्षम नहीं था। कुछ दिन पहले भी इमरान खान ने पाकिस्तान में अमेरिकी एयरबेस के सवाल पर तीखा जवाब देकर कूटनीतिक हलके में तहलका मचा दिया था। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद इमरान खान ऐसे बयानों के जरिए बाइडन प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान का भारत की तुलना में अमेरिका से मजबूत संबंध अमेरिकी मीडिया द न्यूयॉर्क टाइम्स को हाल में ही दिए इंटरव्यू में इमरान खान ने अफगानिस्तान से अमेरिका की विदाई के बाद पाकिस्तान की भविष्य की रणनीति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान से अधिक की उम्मीद करता रहा है, जबकि अतीत में सभी पाकिस्तानी सरकारों ने अमेरिका को वह सब देने की कोशिश की जिसे वह खुद करने में सक्षम नहीं थे। अमेरिका के साथ पाकिस्तान के भविष्य के संबंधों से संबंधित एक सवाल का जवाब में इमरान ने कहा कि पाकिस्तान का हमेशा पड़ोसी भारत की तुलना में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध रहा है। भारत-अमेरिका संबंध जैसे मजबूत रिश्ता चाहते हैं इमरान इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान ने 9/11 हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी युद्ध में शामिल होने का विकल्प चुना था। अब अमेरिका के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद पाकिस्तान एक सभ्य संबंध चाहता है। हम व्यापारिक रिश्तों में सुधार करना चाहते हैं। 'सभ्य' का मतलब बताते हुए इमरान ने कहा कि वह बराबरी का रिश्ता चाहते हैं। जैसा कि अमेरिका का भारत या ब्रिटेन के साथ है। पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ देने की चुकाई कीमत उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान और अमेरिका ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। उन्होंने यह भी बताया कि इस युद्ध में 70000 पाकिस्तानियों की मौत भी हुई। इमरान ने कहा कि बम विस्फोटों और आत्मघाती हमलों के कारण पाकिस्तान को 150 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान भी झेलना पड़ा। इसके बावजूद अमेरिका, पाकिस्तान से और अधिक की उम्मीद कर रहा है। और दुर्भाग्य से पाकिस्तानी सरकारों ने उसे यह देने की कोशिश भी की। कई सवालों के जबाव इमरान को 'नहीं पता' यह पूछे जाने पर कि क्या अफगानिस्तान से बाहर निकलने के बाद पाकिस्तान अमेरिका के लिए अपने रणनीतिक महत्व को बरकरार रख पाएगा, तो प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने इस बारे में इस तरह से नहीं सोचा है। पाकिस्तान और अमेरिका के बीच सैन्य संबंधों के जवाब में इमरान ने कहा कि अमेरिका की वापसी के बाद, मुझे नहीं पता कि यह किस तरह का सैन्य संबंध होगा।


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