अमेरिका में पिछले साल नवंबर में हुए राष्ट्रपति चुनावों में प्रचार का दौर वैसा रोमांचक, नाटकीय और यादगार नहीं रहा, जैसा मतों की गिनती का आम तौर पर औपचारिक माना जाने वाला दौर। लेकिन सबसे ज्यादा हैरतअंगेज रहा चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद संसद की बैठक में जीत-हार के फैसले पर मुहर लगाने वाला पल। जिस तरह से ट्रंप समर्थकों की बेकाबू भीड़ कैपिटल बिल्डिंग के अंदर घुस आई और तोड़फोड़ मचाते हुए चुनाव नतीजों की पुष्टि की औपचारिक प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की, उसने सबको सकते में डाल दिया। यह घटना किसी भी लोकतंत्र के लिए शर्मनाक कही जाएगी। अमेरिका में भी पक्ष और विपक्ष दोनों इस बात पर सहमत हैं कि इस घटना ने एक लोकतंत्र के रूप में उन्हें पूरी दुनिया के सामने शर्मिंदा किया।
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