पोर्ट लुईस भारत ने मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर एक दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया है। ऐसा बहुत ही कम होता है जब किसी देश के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष के निधन पर दूसरा देश शोक मनाए। लेकिन, अनिरुद्ध जगन्नाथ ऐसी शख्सियत थे जिनकी तारीफ इंदिरा गांधी भी खूब करती थीं। यही कारण था कि इस देश की आजादी के दो साल बाद वह मॉरीशस पहुंचने वाली पहली भारतीय प्रधानमंत्री बनीं। उनके बाद मार्च 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी मॉरीशस का दौरा किया था। भारत जब अप्रैल-मई में कोरोना की दूसरी लहर से पैदा हुई आपात स्थिति का सामना कर रहा था, तब अमेरिका से पहले इस छोटे से देश ने मदद भेजी थी। भारत और मॉरीशस के बीच इसी रिश्ते के कारण इंदिरा गांधी ने इस देश को 'छोटा इंडिया' नाम दिया था। ची न-अमेरिका को चुभ रही इस देश में भारत की मजबूत उपस्थिति मॉरीशस की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि इस देश पर ब्रिटेन, अमेरिका, चीन समेत कई यूरोपीय देश आज भी अपना दबदबा कायम करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इन सबके बावजूद यहां भारतीय मूल के लोगों के प्रेम ने इस देश को भारत के साथ मजबूती से जोड़े रखा है। 1968 में अंग्रेजों की दासता से आजादी मिलने के बाद से ही भारत में चाहें कोई भी सरकार रही हो, उसने मॉरीशस और वहां के लोगों की मदद ही की है। क्या था ? साल 2013 में एशियन सिक्योरिटी मैगजीन में ऑस्ट्रेलिया के प्रोफेसर डेविड ब्रूस्टर और भारतीय नौसेना के पूर्व गुप्तचर रहे रंजीत राय ने 'ऑपरेशन लाल डोरा: इंडियाज एबॉर्टेड मिलिट्री इंटरवेंशन इन मॉरीशस' नाम से एक लेख में इस ऑपरेशन की पूरी पटकथा लिखी थी। इस लेख में हिंद महासागर में भारतीय सैन्य योजना, रणनीतिक सोच, गुटनिरपेक्षता की नीति से बाहर निकलने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, इस ऑपरेशन को भारत सरकार की तरफ से आजतक आधिकारिक रूप से स्वीकारा नहीं गया। हिंदू विरोधी पॉल बेरेंजर करना चाहते थे तख्तापलट यह घटना 1983 की है, जब मारीशस के तत्कालीन राष्ट्रपति अनिरुद्ध जगन्नाथ को सोवियत समर्थक वामपंथी कैबिनेट अधिकारी पॉल बेरेंजर के द्वारा तख्तापलट की चिंता सताने लगी थी। चूंकि, आजादी के बाद से ही भारत की इस देश में खासी दिलचस्पी थी, इसलिए उस समय भारत की प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी ने भारतीय हितों की रक्षा के लिए सैन्य हस्तक्षेप की योजना बनाई। इसे ऑपरेशन लाल डोरा नाम दिया गया। मॉरीशस में भारतीय नौसेना के जंगी जहाजों की तैनाती इस ऑपरेशन के तहत मॉरीशस में भारतीय नौसेना के कई जंगी जहाजों को तैनात करने की योजना थी। जिसमें कम से कम 6 डिस्ट्रॉयर, तेजी से कार्रवाई करने के लिए सी किंग और दूसरे हेलिकॉप्टर, सैन्य और नागरिक टैंकर तैनात किए जाने थे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी मिशन की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन इसकी भनक अनिरुद्ध जगन्नाथ के विरोधी पॉल बेरेंजर को मिल गई और उसने डरकर तख्तापलट करने का प्लान ही रद्द कर दिया। जिसके बाद भारत ने भी अपनी सेना नहीं भेजी। अनिरुद्ध जगन्नाथ की सरकार को क्यों था तख्तापलट का डर मॉरीशस में 48 फीसदी जनसंख्या हिंदुओं की है। ये लोग अंग्रेजों के समय भारत के अलग-अलग राज्यों से काम करने के लिए गिरमिटिया मजदूर बनकर वहां पहुंचे थे। बाद में इन लोगों ने अपनी मेहनत और लगन से इस देश की कायापलट कर दी। 1980 के दशक की शुरुआत में ही मॉरीशस में पॉल बेरेंजर अल्पसंख्यक ईसाई और मुस्लिमों के साथ मिलकर अनिरुद्ध जगन्नाथ को सत्ता से हटाना चाहते थे। पाल बेरेंजर की प्रमुख नीति ही हिंदू विरोध की थी, तब मॉरीशस में यहां तक कहा जाता था कि अगर यह व्यक्ति सत्ता में आता है तो इस देश से हिंदूओं को वापस भारत जाना पड़ेगा। बेहद कामयाब माना जाता है भारत का यह ऑपरेशन कूटनीतिक नजरिए से अगर आपका दुश्मन डरकर पहले ही अपनी योजना रद्द कर देता है तो उसे बेहद सफल ऑपरेशन माना जाता है। मॉरीशस में भारत के डर से विपक्षी नेता पॉल बेरेंजर ने यही किया। यही कारण रहा कि अनिरुद्ध जगन्नाथ ने तब भारत से अपने देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के लिए एक वरिष्ठ सहयोगी भेजने का आग्रह किया था। उनके इस निवेदन पर कई साल तक एक भारतीय अधिकारी ने मॉरीशस के एनएसए का पद संभाला। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है मॉरीशस मॉरीशस हिंद महासागर के रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित है। इस इलाके से होकर हर साल खरबों डॉलर का व्यापार होता है। अफ्रीकी महाद्वीप के नजदीक होने से इस देश से हिंद महासागर के बड़े इलाके पर नजर रखी जा सकती है। इस देश के पास ही रेयूनियों द्वीप है, जिसपर फ्रांस का कब्जा है। फ्रांस ने इस द्वीप पर बड़ा मिलिट्री बेस बनाकर रखा हुआ है। मॉरीशस के उत्तर-पूर्व में डिएगो गार्सिया है, जहां अमेरिकी और ब्रिटिश मिलिट्री का बेस है। मॉरीशस और भारत में करीबी रिश्ता भारत और मॉरीशस के बीच संबंधों की मजबूती को इसी बात से समझा जा सकता है कि यह देश अपना राष्ट्रीय दिवस गांधीजी की नमक सत्याग्रह के वर्षगांठ के दिन यानी 12 मार्च को मनाता है। मॉरीशस का मानना है कि इसी की प्रेरणा से उसे 1968 में अंग्रेजों से आजादी मिली। भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता, ब्लू ओशन इकनॉमी, समुद्री सुरक्षा, एंटी पायरेसी ऑपरेशन जैसे कई महत्वपूर्ण अभियानों में मॉरीशस हमेशा भारत के साथ रहा है। भारत ने मॉरीशस में बनाए मेट्रो और अस्पताल भारत ने वर्ष 2016 में मॉरीशस को दिए गए 353 मिलियन अमेरिकी डॉलर का विशेष आर्थिक पैकेज के जरिए न्यू मॉरीशस सुप्रीम कोर्ट बिल्डिंग प्रोजेक्ट को शुरू किया था। इस बिल्डिंग का उद्धाटन साल 2020 में किया गया। इसके अलावा भारत की मदद से मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुईस में मेट्रो एक्सप्रेस सर्विस को शुरू किया गया। इसके अलावा 100-बेड वाले अत्याधुनिक ईएनटी अस्पताल का भी निर्माण भारत के सहयोग से किया गया है।
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