Tuesday, 15 June 2021

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ब्रसेल्स बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में जारी अमेरिका नीत सैन्य गठबंधन नाटो की बैठक में अफगानिस्तान मुद्दा छाया हुआ है। तुर्की ने आगे बढ़कर के संचालन और रक्षा की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया है। इस बैठक के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन ने एयरपोर्ट की जिम्मेदारी संभावने के बदले अमेरिका से सैन्य और आर्थिक सहायता देने का अनुरोध किया है। बता दें कि नाटो सहयोगी होते हुए रूस से एस-400 डिफेंस सिस्टम खरीदने के कारण तुर्की और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। एर्दोगन ने अमेरिका से मांगी सहायता बैठक के बाद राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा कि नाटो सैनिकों की वापसी के बाद अगर उसे काबुल के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की रक्षा और संचालन के लिए अफगानिस्तान में अपने सैनिकों को रखना पड़ा,तो उनके देश को अमेरिका से राजनयिक, साजो सामान संबंधी और आर्थिक सहयोग चाहिए होगा। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के नेताओं के साथ बैठकों के बाद एर्दोगन ने कहा कि अमेरिका नीत नाटो बल के वापस जाने के बाद तुर्की अफगानिस्तान में नए मिशन के लिए पाकिस्तान और हंगरी से बात कर रहा है। प्रमुख वायुमार्गों की रक्षा और हवाई अड्डे की सुरक्षा चाहता है नाटो ऐसा माना जा रहा है कि तुर्की ने हवाई अड्डे पर सुरक्षा मुहैया कराने की पेशकश की है, क्योंकि प्रश्न उठ रहे हैं कि यहां से अमेरिका के वापस जाने के बाद प्रमुख परिवहन मार्गों और हवाई अड्डे पर सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। एर्दोगन ने कहा कि अगर वे नहीं चाहते की हम अफगानिस्तान से जाएं, अगर वे तुर्की का समर्थन चाहते हैं, तो अमेरिक से हमें जो राजनयिक, साजो सामान संबंधी और आर्थिक सहयोग मिलेगा उसके काफी मायने होंगे। अफगानिस्तान में तुर्की के 500 सैनिक मौजूद तुर्की, एक बहुसंख्यक मुस्लिम राष्ट्र है जिसका अफगानिस्तान के साथ घनिष्ठ ऐतिहासिक संबंध हैं और वर्तमान में युद्धग्रस्त देश में उसके लगभग 500 सैनिक हैं एर्दोगन ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ उनकी बैठक काफी अच्छी रही और उन्होंने बाइडन को तुर्की आने का निमंत्रण भी दिया है। वहीं, बाइडन ने कहा कि वह आश्वस्त हैं कि तुर्की के साथ संबंधों में सही में तेजी आएगी। बाइडन बोले- अफहानिस्तान के प्रति सभी वादों को पूरा करेंगे अफगानिस्तान के सवाल पर बाइडन ने कहा कि नेताओं के बीच अफगानिस्तान को लेकर एक बड़ी सहमति बनी है। हमारे सैनिक वहां से लौट रहे हैं लेकिन हम इस बात पर सहमत हुए हैं कि अफगानिस्तान के लोगों के लिए हमारी राजनयिक, आर्थिक, मानवीय प्रतिबद्धताओं को हम पूरा करेंगे। तुर्की क्यों चाहता है इस एयरपोर्ट का संचालन करना? काबुल एयरपोर्ट के संचालन करने के पीछे तुर्की की सोची समझी रणनीति है। अमेरिका और तुर्की के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका ने तुर्की के रक्षा उद्योगों पर कई प्रतिबंध भी लगाए हुए हैं। रूस से नजदीकी के कारण नाटो में तुर्की की पूछ काफी कम हो गई है। इसलिए राष्ट्रपति एर्दोगन अपने देश से हजारों किलोमीटर दूर इस एयरपोर्ट की जिम्मेदारी संभालने की बात कर रहे हैं। इसके अलावा अफगानिस्तान का एयरस्पेस एक अंतराष्ट्रीय एयर रूट भी है। इसपर कब्जे का मतलब एशिया और यूरोप के आसमान पर कब्जा करना है।


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