यह विडंबना ही है कि अफगानिस्तान में आतंकवादी तत्वों को सबक सिखाने वाला अमेरिका 9/11 की 20वीं बरसी पर उन्हीं आतंकवादी गुटों के समक्ष आत्मसमर्पण करेगा, जिन्हें अमेरिकी हवाई हमलों के जरिए सत्ता से उखाड़ फेंका गया था। 11 सितंबर, 2001 को न्यू यॉर्क और वॉशिंगटन पर अलकायदा द्वारा यात्री विमानों से किए गए हमलों के बाद बौखलाए अमेरिका ने काबुल में अलकायदा और तालिबान के ठिकानों को लंबी दूरी की मिसाइलों से तहस-नहस कर दिया था। लेकिन आज अमेरिका 9/11 की उस दिल दहला देने वाली घटना को भूल जाना चाहता है। तब रूस और ईरान भी तालिबान के खिलाफ थे, लेकिन अमेरिका की अदूरदर्शी नीतियों की वजह से आज वह समीकरण पूरी तरह पलट चुका है। रूस और ईरान घोर अमेरिका विरोधी हो चुके हैं। अमेरिका को सबक सिखाने के लिए उन्होंने तालिबान के साथ रिश्ते बना लिए हैं।
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