Tuesday, 8 June 2021

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मेक्सिको सिटी दुनियाभर के देशों में अब कोरोना के मैक्सिकन वैरियंट ने तबाही मचाई हुई है। मेक्सिको में म्यूटेट हुए इस वायरस के खतरनाक स्ट्रेन ने यूरोप के कई देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि यह वैरियंट पहले के सभी स्ट्रेन की तुलना में ज्यादा खतरनाक और संक्रामक है। मेक्सिको में मिले कोरोना के कुल मामलों में इस वैरियंट से संक्रमित लोगों की संख्या 52.3 फीसदी है। डब्लूएचओ ने नहीं दिया कोई नाम इस स्ट्रेन को वैज्ञानिक T478K के नाम से जानते हैं। आम बोलचाल की भाषा में इसे के रूप में जाना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने सिस्टम के तहत अभी तक इस वैरियंट का नामांकरण नहीं किया है। बता दें कि डब्लूएचओ ग्रीक अक्षरों का उपयोग करते हुए अलग-अलग देशों में मिले कोरोना के वैरियंट्स को नाम दे रहा है। इस वैरियंट के संक्रमण दर से वैज्ञानिक परेशान वैज्ञानिक इस वैरियंट के संक्रमण की दर को लेकर चिंतित हैं। यह स्ट्रेन उत्तरी अमेरिका के कई देशों खासकर मेक्सिको में काफी तेजी से फैल रहा है। यही कारण है कि मेक्सिको के कुल कोविड संक्रमण में इस स्ट्रेन की हिस्सेदारी 50 फीसदी से भी ज्यादा है। यूनिवर्सिटी ऑफ बोलोग्ना के फार्मेसी और बॉयोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में प्रोफेसर फेडेरिको जियोर्गी ने एक स्टडी के बाद कहा कि यह संक्रमण की दर और गति के हिसाब से यह ब्रिटिश वैरियंट से भी अधिक खतरनाक है। यूरोप के इन देशों तक पहुंचा मैक्सिकन वैरियंट मैक्सिकन वैरियंट अभी तक यूरोप के जर्मनी, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और इटली में पाया गया है। यह वैरियंट इंसानों के इम्यून सिस्टम में पाए जाने वाले एंटीबॉडीज के साथ बदलकर किसी भी दवा के प्रभाव को निष्क्रिय कर सकता है। इससे संक्रमित होने के बाद ठीक होने में भी काफी समय लग रहा है। बताया जा रहा है कि वायरस के इस स्ट्रेन पर केवल कुछ ही दवा प्रभाव डाल रही हैं। भारत में भी मिला कोरोना का नया वैरियंट भारत के नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) ने कोविड-19 के नए वेरिएंट B.1.1.28.2 का पता लगाया है। यह वेरिएंट यूनाइटेड किंगडम और ब्राजील से भारत आए लोगों में मिला है। नया वेरिएंट संक्रमित लोगों में गंभीर लक्षण पैदा कर सकता है। NIV के पैथोजेनिसिटी की जांच करके बताया है कि यह वेरिएंट गंभीर रूप से बीमार करता है। स्‍टडी में वेरिएंट के खिलाफ वैक्‍सीन असरदार है या नहीं, इसके लिए स्‍क्रीनिंग की जरूरत बताई गई है। NIV की यह स्‍टडी ऑनलाइन bioRxiv में छपी है। हालांकि NIV पुणे की ही एक और स्‍टडी कहती है कि Covaxin इस वेरिएंट के खिलाफ कारगर है। स्‍टडी के अनुसार, वैक्‍सीन की दो डोज से जो ऐंटीबॉडीज बनती हैं, वे इस वेरिएंट को न्‍यूट्रलाइज करने में सक्षम हैं। चूहों के फेफड़ों पर किया बहुत गहरा असर स्‍टडी के अनुसार, B.1.1.28.2 वेरिएंट ने संक्रमित सीरियाई चूहों पर कई प्रतिकूल प्रभाव दिखाए हैं। इनमें वजन कम होना, श्‍वसन तंत्र में वायरस की कॉपी बनाना, फेफड़ों में घाव होना और उनमें भारी नुकसान देखा गया। स्‍टडी में SARS-CoV-2 के जीनोम सर्विलांस की जरूरत पर जोर दिया गया है ताकि इम्‍युन सिस्‍टम से बच निकलने वाले वेरिएंट्स को लेकर तैयारी की जा सके।


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