Sunday, 13 June 2021

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लंदन कोरोना वायरस की महामारी फैलने को लेकर चीन पर आरोप लगते रहे हैं। ब्रिटेन में हुए जी-7 समिट (G-7 Summit) के दौरान भी सदस्य देशों ने वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए नई स्टडी की मांग की। इसमें चीन की भूमिका को लेकर पहले भी जांच की गई थी और विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम चीन भेजी गई थी लेकिन उसे पूरा डेटा नहीं दिया गया था। समिट में चीन पर लगे मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों पर भी बयान जारी किया गया। वायरस लीक की जांच हो जी-7 देशों ने अपने बयान में मांग की है कि WHO एक्सपर्ट्स से कोविड-19 की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए साइंस पर आधारित पारदर्शी जांच समय से कराए। वहीं, ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक राब ने कहा है कि महामारी के वुहान लैब से लीक वायरस से फैलने की आशंका को लेकर अधिकारियों के ‘तुलनात्मक नोट’ और अधिक जांच की मांग करते हैं। WHO चीफ ने भी माना इससे पहले WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अदनोम गेब्रेयसस ने शनिवार को कहा था कि कॉर्नवाल में आयोजित जी-7 सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य मामलों और महामारी के स्रोत का पता लगाने को लेकर आयोजित औपचारिक सत्र में इस आशंका को उठाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि वायरस की उत्पत्ति की स्टडी का पहला चरण निर्णायक नहीं था और वहां पर चार सिद्धांत थे लेकिन उनपर अबतक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। इसलिए हमारा मानना है कि सभी चारों सिद्धांत खुले होने चाहिए और हमें दूसरे चरण की ओर बढ़ना चाहिए ताकि वायरस के ओरिजन का पता चल सके। हॉन्ग-कॉन्ग, शिनजियांग पर चीन को घेरा रविवार को जारी किए गए बयान में बंधुआ मजदूरी के खिलाफ चिंता जाहिर की गई। इसमें कहा गया कि चीन को शिनजियांग में मानवाधिकारों का सम्मान करना चाहिए, हॉन्ग-कॉन्ग को ज्यादा स्वायत्ता देनी चाहिए और दक्षिण चीन सागर में सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों ने कुछ हद तक उनका समर्थन भी किया। बाइडेन के साथ नहीं यूरोप? बाइडेन चीन के साथ आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धा करने के लिए साथी लोकतांत्रिक नेताओं को अधिक एकजुट मोर्चा पेश करने पर राजी करना चाहते थे। हालांकि, यूरोप के नेताओं ने उस तरह उनका साथ नहीं दिया जिस तरह वह उम्मीद कर रहे होंगे। बयान जारी करने से पहले तक कई मुद्दों पर बोलना है या नहीं, इसे लेकर फैसला नहीं हो सका था। अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक सभी देशों ने बाइडेन का कई मुद्दों पर साथ दिया लेकिन चीन को लेकर ठोस सहमति नहीं बन सकी। खासकर जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और इटली के प्रधानमंत्री मारियो डराघी और दूसरे नेताओं को चिंता थी कि बयान को चीन को उकसाने के तौर पर न देखा जाए। चीन से आर्थिक चुनौती पर भी नजर जी-7 के नेताओं ने यह भी कहा है कि वे चीन के बाजार निर्देशित अर्थव्यवस्था से अलग तरीकों को चुनौती देने के लिए मिलकर काम करेंगे। बयान में जी-7 ने कहा, 'चीन और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिल रही प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में, हम बाजार निर्देशित अर्थव्यस्था से भिन्न नीतियों और तरीकों को चुनौती देने के लिए सामूहिक पहल के वास्ते परामर्श करते रहेंगे क्योंकि ऐसे तरीके वैश्विक अर्थव्यवस्था के निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन को कमजोर बनाते हैं।'


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