ला पाज दक्षिण अमेरिकी देश में एक पूर्व राष्ट्रपति की नजरबंदी पर चल रही बहस के दौरान पक्ष और विपक्ष के नेता भिड़ गए। दोनों पक्षों के नेताओं के बीच जमकर मारपीट हुई। ऐसा नहीं है कि संसद के अंदर हुए इस बवाल में केवल पुरुष सांसद ही शामिल थे। दोनों ही पार्टियों की महिला सांसदों के बीच भी हाथापाई हुई। इन महिला नेताओं ने एक दूसरे के बाल खींचे और मुक्के बरसाए। बाद में संसद के सुरक्षाकर्मियों और दोनों ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बीचबचाव कर मामला शांत करवाया। बहस के बाद शुरू हुई मारपीट दरअसल, मंगलवार को जब बोलिवियाई संसद में पूर्व अंतरिम राष्ट्रपति जीनिन अनेज को हिरासत में लेने के मामले में बहस चल रही थी। इस दौरान विपक्षी राजनेता हेनरी मोंटेरो और सत्तारूढ़ समाजवादी एमएएस पार्टी के सदस्य एंटोनियो कोलके के बीच बहसबाजी होने लगी। देखते ही देखते ये दोनों नेता अपनी-अपनी सीटें छोड़कर संसद के बीचोंबीच आ गए और मारपीट शुरू कर दी। महिला सांसदों ने भी खींचे एक दूसरे के बाल दोनों नेताओं को संसद के अंदर हाथापाई करते देख दूसरे भी नेता वहां पहुंच गए। लेकिन, वे एक दूसरे को छुड़ाने के दौरान खुद ही भिड़ गए। इस दौरान महिला सांसदों ने भी मारपीट शुरू कर दी। इस घटना की वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है। लड़ाई करने वाली महिला नेताओं के नाम तातियाना अनेज डे क्रिमोस और मारिया अलानोका है। किस बात को लेकर हो रही थी बहस बोलिवियाई पूर्व राष्ट्रपति जीनिन अनेज को मार्च में गिरफ्तार किया गया था। विपक्षी पार्टियां उनकी गिरफ्तारी को लेकर नाराज थीं। जिसके बाद संसद में बहस हो रही थी कि क्या जीनिन अनेज ने चुनाव में घोखाधड़ी करके एक अस्थाई सरकार का नेतृत्व किया था। उनके ऊपर यह भी आरोप है कि जीनिन ने पूर्व राष्ट्रपति इवो मोरालेस को उखाड़ फेंकने के लिए तख्तापलट की कोशिश भी की थी। मार्च में गिरफ्तार किए गए थे जीनिन अनेज लड़ाई के बाद सत्तारूढ़ समाजवादी एमएएस पार्टी के सदस्य एंटोनियो कोलके ने कहा कि उन्होंने मुझे पकड़ लिया था। वे पीछे से मुझे खींच रहे थे। संसद के अंदर ऐसे काम की हम कभी भी अनुमति नहीं देंगे। पिछले कुछ महीने से बोलिविया में राजनीतिक संघर्ष काफी जोर पकड़ रहा है। इसी साल मार्च में पूर्व अंतरिम राष्ट्रपति जीनिन अनेज को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था। तब आरोप लगाया गया था कि उनके तख्तापलट के प्रयासों के कारण पूर्व राष्ट्रपति मोरालेस को नवंबर 2019 में इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
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