रोम करीब दो साल पहले 14 अगस्त 2019 को वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड में दूर कहीं से आईं गुरुत्वाकर्षण तरंगें डिटेक्ट की थीं। माना जा रहा था कि ये तरंगें दो सितारों के सिस्टम के विलय के कारण पैदा हुई होंगी, जिसमें से एक सूरज से 23 गुना बड़ा ब्लैक होल रहा होगा और दूसरा 2.6 गुना बड़ा। अब वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि इनमें से दूसरा सेकंडरी ऑब्जेक्ट सबसे भारी न्यूट्रॉन स्टार रहा होगा या सबसे हल्का ब्लैक होल। यह स्टडी फिजिकल रिव्यू लेटर्स में छपी है। गुरुत्वाकर्षण तरंग बनी पहेली यूनिवर्सिटी ऑफ पीसा, यूनिवर्सिटी ऑफ फरेरा और नैशनल इंस्टिट्यूट फॉर फिजिक्स ने इस गुरुत्वार्षण तरंग GW190814 के स्रोत को समझने के लिए स्टडी की जिसे LIGO-Virgo ने डिटेक्ट किया था। स्टडी से जुड़े रिसर्चर्स ने Phys.org को बताया, 'हमारे मॉडल के मुताबिक विशाल न्यूट्रॉन स्टार्स की सघनता इतनी ज्यादा होती है कि न्यूट्रॉन, प्रोटॉन और दूसरे पार्टिकल्स से बने सामान्य न्यूक्लियर मैटर वाले फेज से क्वार्क (quark) से बने फेज में ट्रांजिशन मुमकिन हो सकता है जिसमें strange quark शामिल होते हैं।' ब्लैक होल से इस सितारे की टक्कर? रिसर्चर्स के मुताबिक सितारों के दो समूह होते हैं जिनमें से एक नॉर्मल न्यूट्रॉन स्टार होते हैं और दूसरे strange quark star। जब न्यूट्रॉन स्टार क्वॉर्क स्टार में बदलता है तो सुपरनोवा विस्फोट के बराबर ऊर्जा निकलती है। इस स्टडी के दौरान जब GW190814 के दूसरे ऑब्जेक्ट के द्रव्यमान को देखा गया तो पाया गया कि वह इन्हीं क्वॉर्क सितारों के समूह का हो सकता है। ये तरंगें देती हैं कई सवालों के जवाब जब विशाल ब्लैक होल या न्यूट्रॉन सितारे आपस में टकराते हैं तो गुरुत्वाकर्षण तरंगें () निकलती हैं। साल 2015 से अमेरिका की लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रैविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO) और उसके यूरोपीय साथी Virgo ने ऐसे सिग्नल्स डिटेक्ट करने की कोशिश की है। वैज्ञानिक इनकी ध्वनि से कैलकुलेट करते हैं कि टक्कर कहां हुई होगी। कई बार इससे निकलने वाली रोशनी टेलिस्कोप्स को दिखती है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि ये कितनी तेज जा रहे हैं।
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