इस्लामाबाद/नई दिल्ली भारतीय रक्षा मंत्रालय ने मुख्य युद्धक टैंक के 118 यूनिट को खरीदने की मंजूरी दे दी है। चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इस खरीद को अहम बताया जा रहा है। 7,523 करोड़ रुपये की लागत से हैवी व्हीकल फैक्ट्री अर्जुन मार्क-1ए की 118 यूनिट का निर्माण करेगी। खास बात यह है कि अर्जुन टैंक पूरी तरह से भारत में निर्मित है। इस साल फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्जुन टैंक के इस नए वैरियंट को भारतीय सेना को सौंपा था। अर्जुन टैंक के इस नए दस्ते को पाकिस्तान के साथ लगी सीमा पर तैनात करन की योजना है। स्वदेशी अर्जुन एमके-1ए में 54 फीसदी भारतीय उपकरण अर्जुन एमके-1ए की डिजाइन पूरी तरह से स्वदेशी है, हालांकि इसके 54.3 फीसदी पार्ट ही भारत में बने हुए हैं। यह टैंक अर्जुन एमके-1 का ही एक अपग्रेडेड वर्जन है। भारतीय सेना में अर्जुन एमके-2 भी पहले से ही तैनात हैं। इससे पहले बने अर्जुन मार्क-1 में स्वदेशी उपकरण 41 फीसदी ही थे। इस टैंक में अत्याधुनिक ट्रांसमिशन सिस्टम लगाया गया है। जिससे टैंक के अंदर बैठा गनर सीधे कंट्रोल सेंटर से जुड़ सकता है। इसके अलावा वह साथ के टैंकों के साथ कोऑर्डिनट कर दुश्मन के ठिकानों पर प्रभावी हमला भी कर सकता है। दुश्मन के हमलों को झेलने में सक्षम है अर्जुन टैंक अर्जुन एमके-1ए दुश्मन के ग्रेनेड और मिसाइल हमलों को भी झेलने में सक्षम हैं। इस टैंक के बाहरी हिस्से में रिएक्टिव ऑर्मर लगे हुए हैं। जो दुश्मन के किसी भी मिसाइल या रॉकेट के प्रभाव को अपने ऊपर झेलकर कम कर सकते हैं। ये रिएक्टिव आर्मर विस्फोटकों से लैस होते हैं। जैसे ही दुश्मन की मिसाइल टकराती है, इनमें विस्फोट हो जाता है। जिससे दुश्मन की मिसाइल या रॉकेट टैंक के अंदर नहीं घुस पाते। इस टैंक में रसायनिक हमलों से बचने के लिए भी कई सेंसर लगाए गए हैं। जिससे अंदर बैठे क्रू मेंबर बाहरी हमले से सुरक्षित रह सकते हैं। कई तरह से सिस्टम से लैस है अपना अर्जुन टैंक इस टैंक में लगा लेजर वॉर्निंग सिस्टम अंदर बैठे गनर और कमांडर को खतरे की चेतावनी देता है। वह दुश्मनों की मिसाइल और उनकी लोकेशन को भी बताने में सक्षम है। इसमें रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम, एडवांस लैंड नेविगेशन सिस्टम भी लगा है। इस टैंक में फिन स्टेबलाइज्ड पियर्सिंग डिसकार्डिंग सेबट गोले का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस गोले की मदद से दुश्मन के टैंक पर कम समय में सटीक निशाना लगाया जा सकता है। इसमें स्वदेशी 120 एमएम कैलिबर की गन भी लगी हुई है। इसमें कंप्यूटर ऑपरेटेड फायर सिस्टम भी लगा हुआ है, जो दिन और रात दोनों समय प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। कितना ताकतवर पाकिस्तान का मुख्य युद्धक टैंक अल खालिद मुख्य रूप से एक चीनी हथियार है। चीन ने इसे 1990 के टाइप 90-IIM टैंक से विकसित किया था। इसके मूल प्रोटोटाइप को चाइना नॉर्थ इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (नोरिन्को) MBT-2000 नाम से बनाया था। पाकिस्तान में इस टैंक को अल खालिद का नाम दिया गया। चीन ने 2014 तक लगभग 310 अल खालिद टैंक को चीन को सौंपा था। इस टैंक का इस्तेमाल बांग्लादेश, मोरक्को और पेरू की सेना भी करती है। 125 एमएम की कैनन है अल खालिद का मुख्य हथियार तीन क्रू के जरिए संचालित अल खालिद टैंक में 125 मिमी की स्मूथबोर कैनन गन लगी हुई है। ऑटो लोड तकनीक से लैस यह टैंक फायर कंट्रोल सिस्टम और रात में ऑपरेट करने की क्षमताओं से भी लैस है। अल खालिद में वर्तमान में यूक्रेन के KMDB डिज़ाइन ब्यूरो के बनाए डीजल इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। पाकिस्तानी सेना में यह टैंक 2001 में शामिल हुआ था। जिसके बाद इस टैंक को पाकिस्तान ने अपग्रेड भी किया है। दो मशीनगनों से लैस है अल खालिद पाकिस्तान अल खालिद टैंक के तीन वैरियंट का इस्तेमाल करता है। इसमें अल खालिद, अल खालिद-1 और अल खालिद-2 शामिल हैं। 46 टन वजनी यह टैंक 33 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा है। इस टैंक में कंपोजिट ऑर्मर का इस्तेमाल किया गया है। इसमें 7.62 एमएम की मशीनगन भी लगी हुई है, जो प्रति मिनट 3000 राउंड फायर करने में सक्षम है। इसमें 12.7 एमएम की एक और मशीनगन लगी हुई है, जो 500 राउंड प्रतिमिनट फायर कर सकती है। इसका 6 सिलिंडर वाला इंजन 1200 एचपी तक की ताकत पैदा कर सकता है।
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