Thursday, 23 September 2021

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प्लाइमाउथ द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद खेती के आधुनिकीकरण के पश्चात केवल 75 वर्षों में ब्रिटेन में किस तरह 'हेजग्रो' या 'हेजेज' (झाड़ियों) का हृास हो गया, इस पर प्रकाश डालते हुए काउंसिल फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ रूरल इंग्लैंड (सीपीआरई) की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि कैसे हेजग्रो प्राकृतिक रूप से वातावरण से कार्बनडाई ऑक्साइड को सोखकर को कम करने में मदद करती है। मौजूदा हेजेज को बड़ा करने से ही समग्र कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन क्षमता (वायुमंडलीय कार्बनडाई ऑक्साइड को ग्रहण और संग्रहीत करने की प्रक्रिया) दोगुनी हो सकती है। कार्बनडाई ऑक्साइड जैसी ''ग्रीनहाउस'' गैसों का निर्माण वातावरण के गर्म होने के रूप में निकलता है, जिसके चलते बाढ़, जंगल की आग और तूफान जैसी चरम मौसमीय घटनाओं की आशंका व गंभीरता बढ़ जाती है। सीपीआरई का तर्क है कि ब्रिटेन के हेजग्रो क्षेत्र में 40% की वृद्धि करने से 18.5 मिलियन टन शुद्ध कार्बनडाई ऑक्साइड संग्रहीत की जा सकती है। हेजग्रो के लाभ जैसा कि आप जानते हैं कि पेड़-पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान प्राकृतिक रूप से कार्बनडाई ऑक्साइड को ग्रहण कर लेते हैं। इसी तरह हेजग्रो प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों को स्वाभाविक रूप से ग्रहण करके जलवायु तबाही को रोकने में हमारी मदद कर सकती है। हालांकि कार्बन को अलग करने की क्षमता पेड़ की प्रजातियों और विभिन्न प्रबंधन प्रथाओं के बीच अलग-अलग होती है। यह अनुमान लगाया जाता है कि मिश्रित नागफनी / ब्लैकथॉर्न हेजेज (ब्रिटिश हेजग्रो में सबसे आम प्रजाति) प्रति हेक्टेयर 42 टन कार्बन जमा कर सकती हैं। इसके अलावा हेजग्रो के कई और फायदे भी हैं, जिनमें फसलों का बचाव, पक्षियों को आश्रय, प्रदूषण में कमी, ईंधन के लिए लकड़ी का उत्पादन, कीटों पर नियंत्रण आदि शामिल है। जलवायु परिवर्तन से पृथ्वी किस कदर प्रभावित हो सकती है, इसको लेकर वैज्ञानिक भविष्यवाणियां इतनी कष्टदायक हैं कि उन्हें बयां नहीं किया जा सकता। एक बात स्पष्ट है कि यदि दुनिया ग्लासगो (2021 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन) में सीओपी26 की बैठक में जिम्मेदारी नहीं लेती है, तो शायद हालात काबू से बाहर हो सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसी युक्तियां हैं, जो मददगार साबित हो सकती हैं। इनमें हेजग्रो को बढ़ावा देना सबसे आसान युक्तियों में से एक है। हेजग्रो की विरासत एक समय हेजग्रो को किसानों का मित्र कहा जाता था, लेकिन जब द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हिटलर ने ब्रिटेन की खाद्य आपूर्ति पर रोक लगा दी तो इसका परिणाम यह हुआ कि विश्वयुद्ध के खत्म होने के बाद की सरकारों ने कृषि को आधुनिक बनाने पर जोर दिया। इसमें परंपरागत तरीकों को छोड़कर नए तरीके अपनाए गए। इस दौरान रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों तथा बड़ी मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा। साथ ही खेतों के आसपास सैकड़ों साल से मौजूद झाड़ियों की कतारों (हेजग्रो) को काटने का सिलसिला शुरू हो गया। इन्हें काटने के लिए किसानों को अनुदान मिलने लगा। कई किसानों ने इन्हें सिर्फ इसलिए काट दिया कि यह उनके लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा था, लेकिन धीरे-धीरे इसका महत्व किसानों और सरकारों की समझ में आने लगा, पर तब तक काफी देर हो चुकी थी। ऐसे में अब जब ब्रिटेन में जलवायु तथा मौसम संबंधी घटनाओं में वृद्धि हो रही है तब इन्हें फिर से उगाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। मिक हेनली, एसोसिएट प्रोफेसर (रीडर) इन प्लांट एनिमल इंटरेक्शंस, यूनिवर्सिटी ऑफ प्लाइमाउथ, द कन्वरसेशन


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