Thursday, 2 September 2021

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काबुल अफगानिस्तान में सरकार का ऐलान करने जा रहा तालिबान चीन की आर्थिक मदद से देश चलाने का ख्वाब देख रहा है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने एक इतालवी अखबार को बताया है कि उनका समूह मुख्य रूप से चीन के आर्थिक मदद पर निर्भर है। इस बीच ऐसी भी खबरें हैं कि चीन तालिबान के जरिए बगराम एयरबेस को हथियाने की चाल चल रहा है। अमेरिका ने अफगान युद्ध के दौरान लगभग 20 साल तक इस एयरबेस का इस्तेमाल किया था। चीन की मदद से अर्थव्यवस्था चलाएगा तालिबान गुरुवार को ला रिपब्लिका द्वारा प्रकाशित अपने इंटरव्यू में मुजाहिद ने कहा कि तालिबान चीन की मदद से आर्थिक वापसी के लिए संघर्ष करेगा। हाल के हफ्तों में काबुल हवाई अड्डे से विदेशी सैनिकों के अराजक प्रस्थान के बाद पश्चिमी देशों ने अफगानिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को प्रतिबंधित कर दिया है। जिसके बाद तालिबान को सरकार चलाने के लिए आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। चीन को बताया महत्वपूर्ण साझेदार तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि चीन हमारा सबसे महत्वपूर्ण साझेदार है और हमारे लिए एक मौलिक और असाधारण अवसर का प्रतिनिधित्व करता है। चीन हमारे देश में निवेश और पुनर्निर्माण के लिए तैयार है। न्यू सिल्क रोड - एक बुनियादी ढांचा पहल जिसके साथ चीन व्यापार मार्ग खोलकर अपने वैश्विक प्रभाव को बढ़ाना चाहता है। तालिबान ने हमेशा इसे प्राथमिकता दी है। कॉपर की खान चीन को सौंपेगा तालिबान उन्होंने चीन का धन्यवाद करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में तांबे की समृद्ध खदानें हैं। हम चीनियों को इन्हें चलाने के लिए धन्यवाद करते हैं। इन्हें फिर से चलाया जा सकता है, इनका आधुनिकीकरण किया जा सकता है। इसके अलावा, चीन दुनिया भर के बाजारों के लिए हमारा पास है। सरकार में महिला मंत्री से किया इनकार मुजाहिद ने यह भी पुष्टि की कि भविष्य में महिलाओं को विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाएं नर्स के रूप में, पुलिस में या मंत्रालयों में सहायक के रूप में काम करने में सक्षम होंगी, लेकिन इस बात से इंकार किया कि सरकार में कोई महिला मंत्री होंगी। तालिबान को पैसों की सख्त जरूरत अफगानिस्तान को पैसों की सख्त जरूरत है। लेकिन, तालिबान की सरकार विदेश में जब्त अफगान केंद्रीय बैंक के 10 अरब डॉलर की संपत्ति का उपयोग नहीं कर सकता है। इसे पाने के लिए तालिबान को उन देशों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करना पड़ेगा। ऐसे में तालिबान को लंबे समय तक चीन से मिले पैसों पर ही निर्भर रहना होगा। बगराम एयरबेस हथियाने के चक्कर में चीन चीन तालिबान को आर्थिक मदद देकर बगराम एयरबेस हथियाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका की वरिष्ठ राजनयिक और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व दूत निक्की हेली ने कहा कि अमेरिका को चीन पर करीबी नजर रखने की आवश्यकता है क्योंकि वह युद्धग्रस्त देश में बगराम वायु सेना अड्डे पर कब्जा जमाने की कोशिश कर सकता है। वह भारत के खिलाफ मजबूत स्थिति हासिल करने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल भी कर सकता है। तालिबान की मदद से शिनजियांग फतह की तैयारी चीन तालिबान की मदद से अपने मुस्लिम बहुत शिनजियांग प्रांत में चरमपंथ पर काबू पाना चाहता है। चीन ने पहले भी इस प्रदेश में मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर जमकर ज्यादातियां की हैं। 10 लाख लोगों को कैद करने और मस्जिदों को तोड़ने के बाद भी चीन इन लोगों पर अपनी नीति थोप नहीं पाया है। चीन लंबे समय से यह भी कहता आया है कि तालिबान-नियंत्रित क्षेत्र का इस्तेमाल शिनजियांग के अलगाववादी ताकतों को शरण देने के लिए किया जाता है। ऐसे में वह इन अलगाववादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह को खत्म करना चाहता है। भारत के लिए मुश्किलें बढ़ाना चाहता है चीन चीन का प्रमुख उद्देश्य अफगान जमीन का इस्तेमाल भारत को घेरने के लिए भी करना है। वह तालिबान पर अपना दबदबा बनाकर अफगानिस्तान से भारत को बाहर करने की प्लानिंग भी कर रहा है। ऐसे में अगर अफगानिस्तान पूरी तरह से चीन के नियंत्रण में चला जाता है तो इससे भारत को तगड़ा झटका लगेगा। भारत ने अफगानिस्तान में करोड़ों डॉलर का निवेश किया है। इसके अलावा वह मध्यपूर्व के देशों में व्यापार के लिए अफगानिस्तान का इस्तेमाल करने की तैयारी में भी है।


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