सियोल दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन देश में कुत्ते के मांस पर प्रतिबंध लगाने का प्लान बना रहे हैं। मून जे-इन खुद कुत्तों से बहुत प्यार करते हैं और उन्होंने लंबे वक्त से चली आ रही इस परंपरा को रोकने का फैसला किया है। देश के खाने में कुत्तों का मांस एक अहम हिस्सा रहा है और माना जाता है कि सालाना यहां 10 लाख कुत्ते खाए जाते हैं लेकिन पिछले कुछ साल में इसकी खपत में कमी आई है। अब लोग कुत्तों को अपने साथी के तौर पर देखते हैं, जानवर के तौर पर नहीं। पालतू कुत्तों का ट्रेंड तेज अब सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं, युवा आबादी भी इस परंपरा के खिलाफ जा रही है। वहीं, मून ने प्रधानमंत्री से कहा, 'क्या अब वक्त नहीं आ गया है कि कुत्तों का मांस खाने को बंद किया जाए?' देश में पालतू कुत्तों का ट्रेंड बढ़ रहा है। मून खुद कई कुत्तों को घर ला चुके हैं। कुत्तों को गोद लेना उनके कैंपेन की शपथ में भी शामिल था और वह कई कुत्तों को बचा चुके हैं। छोड़े जा चुके पालतू कुत्तों और उनके रजिस्ट्रेशन को लेकर चर्चा के बाद मून ने फैसला किया कि अब मांस खाना बंद करने का वक्त आ गया है। खास बाजारों में मिलता है दक्षिण कोरिया में जानवरों के खिलाफ क्रूरता रोकने के लिए इन्हें मारने पर कई नियम हैं लेकिन अब तक इन्हें खाने पर प्रतिबंध नहीं था। कुत्ते का मांस पहले की तुलना में कम हुआ है लेकिन बुजुर्ग लोग इसे खाया करते हैं। यह कुछ रेस्तरां और खास बाजारों में मिलता है। हालांकि, इसे लेकर राजनीतिक विरोधियों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह लोगों की निजी पसंद-नापसंद से जुड़ा मसला है। क्या कहते हैं लोग? डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबि ऐनमिल वेलफेयर समूह ने इस महीने एक पोल जारी किया है जिसमें कहा गया है कि 78% लोगों ने माना है कि कुत्तों और बिल्लियों के मांस के उत्पादन और सेल पर रोक लगनी चाहिए। वहीं, 49% लोगों ने इसे खाने पर बैन लगाने को सही ठहराया है। दूसरी ओर, एक और सर्वे में लोग इसे लेकर बंटे दिखे कि क्या सरकार को इसे लेकर फैसला करना चाहिए या नहीं। हालांकि, 59% लोगों ने माना है कि कानूनी तौर पर इसे लेकर नियम बनने चाहिए।
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