Saturday, 23 October 2021

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इस्तांबुल तुर्की ने घरेलू मामलों में दखल देने के नाम पर अमेरिका, फ्रांस कनाडा समेत 10 देशों के राजदूतों को देश से निकाल दिया है। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने इन देशों के राजदूतों को परसोना नॉन ग्राटा () घोषित किया है। इसका मतलब ये राजदूत तुर्की के लिए अब अवांछित व्यक्ति बन गए हैं। इन राजदूतों को 48 से 72 घंटे के अंदर तुर्की की सीमा से बाहर जाना होगा। आमतौर पर कोई भी देश राजदूत को नहीं बल्कि दूसरे राजनयिकों को देश निकाला देते हैं। की रिहाई मांग रहे थे ये राजदूत तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने शनिवार को कहा कि उन्होंने विदेश मंत्रालय ने सामाजिक कार्यकर्ता उस्मान कवला की रिहाई का समर्थन करने वाले पश्चिमी देशों के 10 राजनयिकों को निकालने का आदेश दिया है। कवला चार साल से जेल में हैं, उन पर 2013 में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की फाइनेंसिंग करने का आरोप है। तुर्की की सरकार ने यह भी आरोप लगाया है कि 2016 में हुए असफल तख्तापलट के पीछे भी उस्मान कवला का ही हाथ था, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से हमेशा इनकार किया है। इन 10 देशों के राजदूतों को छोड़ना पड़ेगा तुर्की 18 अक्टूबर को एक संयुक्त बयान में, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, न्यूजीलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूतों ने कवला के रिहाई की मांग की थी। इन देशों ने कहा था कि कवला मामले में न्यायसंगत और त्वरित समाधान किया जाए। जिसके बाद तुर्की की विदेश मंत्रालय ने इन सभी देशों के राजदूतों को तलब किया और उनके बयान को गैर जिम्मेदाराना बताया था। एर्दोगन ने जनसभा में किया ऐलान एर्दोगन ने उत्तर पश्चिमी तुर्की के एस्किसेहिर शहर में एक भाषण में कहा कि मैंने अपने विदेश मंत्री को आवश्यक आदेश दिया है। उनसे कहा कि इस मामले में क्या किया जाना चाहिए। इन 10 राजदूतों को एक ही बार में परसोना नॉन ग्राटा घोषित किया जाना चाहिए। आपको इसे तुरंत सुलझाना होगा। इससे वे तुर्की को जानेंगे और समझेंगे। जिस दिन वे तुर्की को जानना और समझना छोड़ देंगे, उन्हें यह देश छोड़ना होगा। कवाला पर क्या हैं आरोप? एर्दोगन के इस ऐलान पर अमेरिकी, जर्मन और फ्रांसीसी दूतावासों, वाइट हाउस और अमेरिकी विदेश विभाग ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। कवाला को पिछले साल 2013 के विरोध प्रदर्शनों से संबंधित आरोपों से बरी कर दिया गया था। लेकिन, इस साल एर्दोगन की सरकार ने उस फैसले को पलट दिया था और तख्तापलट के प्रयास से संबंधित एक अन्य मामले को नए आरोपों से जोड़ा दिया।


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