बीजिंग चीन ने 40 लाख की आबादी वाले लांझोउ शहर में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लॉकडाउन का ऐलान किया है। लोगों से कहा गया है कि वे केवल अति आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकले। इस बीच सरकारी टीमों ने पूरे शहर में बड़े पैमाने पर कोरोना टेस्टिंग भी शुरू की है। संक्रमित पाए जाने वाले लोगों को क्वारंटीन किया जा रहा है। चीन ने इसी हफ्ते राजधानी बीजिंग में संक्रमण की रफ्तार को कम करने के लिए होटलों की बुकिंग पर रोक लगाई थी। पिछले 24 घंटे में मिले मात्र 6 केस चीन में कोरोना के संक्रमण की रफ्तार भारत समेत कई देशों की तुलना में काफी धीमी है। इसके बावजूद एहतियातन लॉकडाउन का ऐलान किया गया है। पिछले चौबीस घंटों में चीन में कोरोना वायरस संक्रमण के सिर्फ 29 मामले सामने आए थे। इसमें से लांझोउ में मिले मरीजों की संख्या 6 थी। इसके बावजूद चीन में कोरोना वायरस लॉकडाउन लगा दिया गया है। शहर में आने-जाने वालों पर सरकार की नजर चीन के सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि लांझोउ शहर से बाहर जाने वालों और आने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। सभी लोगों को अपने घरों के अंदर रहने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे हम टेस्टिंग बढ़ा रहे हैं, वैसे-वैसे संक्रमण की रफ्तार भी बढ़ सकती है। राजधानी बीजिंग में होटल बुकिंग पर रोक कभी शून्य संक्रमण वाला शहर रहे बीजिंग में कोरोना के कुल मामले अब बढ़कर 9 हो गए हैं। जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने लोगों की फिर से कोविड जांच शुरू कर दी है। इतना ही नहीं, लोगों के फ्लाइट और होटल बुक कराने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के मुताबिक देश के विभिन्न हिस्सों में कोविड-19 के स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलने के 38 मामले सामने आए हैं। वैक्सीनेशन के बाद लापरवाह हो गए थे लोग? चीन में सबसे पहले कोरोना का संक्रमण देखा गया था। जिसके बाद इस देश ने बड़े पैमाने पर लॉकडाउन किया था। बाद में जब लोगों को वैक्सीन की डोज दी जाने लगी, तब पाबंदियों को भी हटा दिया गया था। 2021 की शुरूआत से ही चीन में लोग बड़े-बड़े आयोजनों में इकट्ठा होते दिखे। चीनी नव वर्ष, राष्ट्रीय दिवस जैसे मौकों पर बड़ी संख्या में लोग सामने दिखे। लोगों ने मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग को भी छोड़ दिया था। चीन की वैक्सीन सबसे कम प्रभावी? चीन में बढ़ते कोरोना के मामलों को देख चीन की वैक्सीन के प्रभाव पर लोगों का शक गहराने लगा है। सिर्फ चीन में ही नहीं, बल्कि जिस-जिस देश में इस वैक्सीन को लगाया गया, वहां कोरोना के मामले तेजी से बढ़े हैं। मंगोलिया, बहरीन, सेशेल्स, चिली और तुर्की समेत कई देशों ने चीन की वैक्सीन का इस्तेमाल किया, जिसका खामियाजा उन्हें तुरंत भुगतना पड़ा। नए वैरियंट पर असरदार नहीं चीनी वैक्सीन कई देशों से मिले डेटा से पता चला है कि चीनी वैक्सीन कोरोना संक्रमण को रोकने में प्रभावी साबित नहीं हो रही है। विशेष रूप से कोरोना के नया वैरियंट के ऊपर इस वैक्सीन का असर बिलकुल नहीं दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों ने कहा है कि किसी भी देश में कोरोना के मामले इस बात पर निर्भर करते हैं कि वह देश अपने नागरिकों को कौन सी वैक्सीन लगवा रहा है।
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