टोक्यो जापान की राजधानी टोक्यो के करीब ज्वालामुखी विस्फोट के बाद प्रशांत महासागर में द्वितीय विश्वयुद्ध के समय के 24 'भूतिया जहाज' नजर आए हैं। ये सभी जहाज द्वितीय विश्वयुद्ध के समय के सबसे चर्चित युद्धों में से एक के दौरान समुद्र में डूब गए थे। जापानी मीडिया के मुताबिक इवो जिमा द्वीप के पश्चिमी तट के पास ये जहाज बहकर पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि पानी के अंदर स्थित ज्वालामुखी फूकूतोकू-ओकानोबा में विस्फोट के बाद ये जहाज पानी से ऊपर आ गए और किनारे पहुंच गए। इवो जिमा द्वीप राजधानी टोक्यो से करीब 1200 किमी की दूरी पर स्थित है। जापानी विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी सेना ने इवो जिमा में वर्ष 1945 में लड़ाई के दौरान इन जहाजों को डुबो दिया था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यह लड़ाई सबसे खूनी जंगों में शामिल थी। यह जंग 36 दिनों तक चली थी और 70 हजार के करीब अमेरिकी सैनिकों ने इसमें हिस्सा लिया था। इस दौरान द्वीप के ज्वालामुखी वाली चट्टानों के नीचे बने बंकरों में जापान के 20 हजार सैनिक छिपे हुए थे। फूकूतोकू-ओकानोबा ज्वालामुखी में पानी के अंदर विस्फोट इस भीषण युद्ध में जापान के केवल 216 सैनिक ही जिंदा पकड़े जा सके थे। बाकी सारे सैनिक अमेरिकी कार्रवाई में मारे गए थे। अमेरिकी सेना ने यहां मौजूद जापानी जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया और उन्हें जानबूझकर डुबो दिया था। फूकूतोकू-ओकानोबा ज्वालामुखी में पानी के अंदर ही गत अगस्त महीने से विस्फोट हो रहा है। इसकी वजह से वहां समुद्र की तलहटी में मौजूद जहाज ऊपर आ रहे हैं और वे बहकर द्वीप के तटों तक पहुंच रहे हैं। यही नहीं ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से समुद्र में चांद के आकार के छोटे-छोटे द्वीप भी बन गए हैं। ये द्वीप झांवा और ज्वालामुखी से निकली राख से बने हैं और माना जा रहा है कि समुद्र में क्षरण की वजह से आने वाले समय में इनका क्षरण हो जाएगा। इवो जिमा बोनिन द्वीप समूह का हिस्सा है जो प्रशांत महासागर में 30 द्वीपों का समूह है। इस द्वीप समूह में अक्सर भूकंप आते रहते हैं और ज्वालामुखी विस्फोट भी होता रहता है।
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